जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ यानी जेएनयूएसयू से क्या विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुक्ति पा ली? यह बड़ा सवाल है क्योंकि जेएनयूएसयू वह ताकत है, जिसकी वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन को बहुत सारे काम करने में बाधा आती है। जेएनयू का छात्र संघ दूसरे किसी भी विश्वविद्यालय के छात्र संघ से ज्यादा सक्रिय रहता है। लेकिन अब चुनाव के तीन महीने बाद ही छात्र संघ के सभी पदाधिकारियों को कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया है। पहले उनका निष्कासन दो हफ्ते का था, लेकिन अब जेएनयूएसू के सभी चार पदाधिकारियों के निष्कासन को दो सेमेस्टर के लिए बढ़ा दिया है।
गौरतलब है कि जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका बाबू, महासचिव सुनील यादव और संयुक्त सचिव दानिश अली को विश्वविद्यालय में तोड़फोड़ करने के आरोप में दो हफ्ते के लिए कॉलेज से निष्कासित किया गया था। अब उनको दो सेमेस्टर के लिए निकाल दिया गया है। इसका अर्थ है कि छात्र संघ की मौजूदा कमेटी अब अगले चुनाव तक अस्तित्व में नहीं रहेगी। क्योंकि दो सेमेस्टर का निष्कासन पूरा होगा उससे पहले नए चुनाव का समय आ जाएगा। आरोप है कि अंबेडकर लाइब्रेरी में बायोमीट्रिक स्कैनर लगाने के विरोध में छात्र संघ के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया था और उस वजह से चारों को निकाल दिया गया। छात्र संघ को लोकतंत्र की पाठशाला की शुरुआती कक्षा माना जाता है। ध्यान रहे तमाम कोशिश के बावजूद राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ा छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जेएनयू में चुनाव नहीं जीत पा रहा है।


