ऐसा लग रहा है कि पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे बाहरी और बांग्ला का मुद्दा जोर पकड़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने लगातार इसी मुद्दे पर फोकस रखा है। अब ममता बनर्जी कह रही हैं कि अगर भाजपा की सरकार आ गई है तो वह बंगाली लोगों को मछली और मांस नहीं खाने देगी। वे कह रही हैं कि भाजपा आ जाएगी तो लोग बांग्ला नहीं बोल पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा आ गई तो बंगाली लोगों को डिटेंशन सेंटर्स में बंद कर देगी। यह बिल्कुल वैसे ही है जैसे पिछले लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को डराते थे कि इंडी गठबंधन वाले जीत गए तो मंगलसूत्र छीन लेंगे, भैंस छीन लेंगे आदि आदि।
बहरहाल, अब फॉर्म छह के जरिए नाम जुड़वाने और फॉर्म सात के जरिए नाम कटवाने के मुद्दे पर घमासान छिड़ा है। तृणमूल कांग्रेस ने दावा किया है कि भाजपा उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के लोगों के नाम मतदाता सूची में जुड़वा रही है। इसके जरिए भी यह धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि बंगाली लोग तो भाजपा को हरा रहे हैं लेकिन भाजपा बाहर से लोगों को लाकर चुनाव आयोग की मदद से वोटर बना रही है ताकि तृणमूल को हरा सके। बाहरी और बांग्लाभाषी आबादी का मुद्दा बनाना ममता बनर्जी के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर चुनाव बांग्ला अस्मिता पर नहीं गया तो तृणमूल कांग्रेस को समस्या हो सकता है।
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