बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाटक खत्म ही नहीं हो रहा है। जब से नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और दिल्ली जाने की चर्चा शुरू हुई तभी से इस बात की भी चर्चा हो रही है कि निशांत राजनीति में आने या कोई पद संभालने को तैयार नहीं हैं। बड़ी मुश्किल से उनको पार्टी में शामिल कराया गया। इसके बाद उनकी यात्रा का कार्यक्रम बना। कहा गया कि वे भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली सरकार में उप मुख्यमंत्री बनेंगे। यह सब कुछ तय हो जाने की खबर आने के बाद कभी यह चर्चा शुरू हो जा रही है कि निशांत कोई पद नहीं लेना चाहते हैं तो कभी यह चर्चा होती है कि नीतीश अभी भी निशांत की राजनीति में एंट्री को लेकर बहुत सहज नहीं हैं। असल में नीतीश कुमार के भूलने की बीमारी शुरू होने के बाद उनकी इस कमजोरी का लाभ उठा कर जो समूह सरकार चला रहा है वह परेशान है और वही इस तरह की खबरें सार्वजनिक कर रहा है।
अब खबर है कि दो दिन पहले निशांत ने अपने पिता नीतीश कुमार से मुलाकात की और उनसे कहा कि वे छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रहें। कहा जा रहा है कि निशांत ने धमकी दी है कि अगर नीतीश मुख्यमंत्री पद अभी तुरंत छोड़ें देते हैं तो वे कोई पद नहीं लेंगे यानी सरकार में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद निशांत की मान मनौव्वल शुरू हो गई है। असल में निशांत के ईर्द गिर्द पिछले कुछ दिनों से एक कोटरी इकट्ठा हो गई है, जिसमें सभी लोग उनके या तो रिश्तेदार हैं या उनकी जाति के लोग हैं। ये किसी तरह से सत्ता की कमान अपने हाथ में रखना चाहते हैं। तभी नीतीश को छह महीने तक सीएम बनाए रखने का दांव चला जा रहा है। लेकिन भाजपा ने भी साफ कर दिया है कि अगर तय टाइमलाइन के हिसाब से काम नहीं होता है और अप्रैल के दूसरे हफ्ते में नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो भाजपा को मजबूरी में सद्भाव छोड़ कर उंगली टेढ़ी करनी पड़ेगी। अगर ऐसा हुआ तो जनता दल यू के अस्तित्व की खतरे में आ जाएगा।
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