भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पश्चिम बंगाल पहुंचे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले वे पुडुचेरी गए थे और उसके बाद तमिलनाडु गए। ये दोनों चुनावी राज्य हैं। अब वे पश्चिम बंगाल के दौरे पर गए हैं। बीच में मथुरा और पटना की यात्रा को छोड़ दें तो उनका फोकस चुनावी राज्यों पर है। उनकी पहली बंगाल यात्रा के लिए जिस इलाके का चयन किया गया है वह खासतौर से दिलचस्प है। वे दक्षिण पश्चिमी हिस्से में गए, जहां बिहारी मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। बिहार और झारखंड से लगती सीमा के पास वर्धमान और आसनसोल को उन्होंने अपनी पहली यात्रा के लिए चुना है। इससे यह भी जाहिर होता है कि भाजपा के लिए उनका बंगाल चुनाव के लिहाज से क्या महत्व है। ध्यान रहे पश्चिम बंगाल के भद्रलोक में ब्राह्मण और कायस्थ सबसे प्रमुख हैं। नितिन नबीन कायस्थ हैं और उनके जरिए भाजपा ने इस वोट को टारगेट किया है।
लेकिन उनकी पहली यात्रा वहां हो रही है, जहां ममता बनर्जी ने पहले से अपने पत्ते बिछाए हुए हैं। बिहार के दो चर्चित चेहरे इस इलाके से ममता बनर्जी की पार्टी के सांसद हैं। आसनसोल से फिल्म स्टार शत्रुध्न सिन्हा सांसद हैं और वर्धमान से पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद सांसद हैं। ध्यान रहे कायस्थों में शत्रुघ्न सिन्हा की लोकप्रियता शायद ही किसी और को हासिल होगी। फिर भी नितिन नबीन अब चूंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तो उनके जरिए भाजपा इसमें भी कुछ सेंध लगाना चाहती है। शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद दोनों लोकप्रिय चेहरे हैं और बिहार के लोगों की पहचान हैं। अब नितिन नबीन के जरिए भाजपा उस पहचान की राजनीति में सेंध लगाना चाहती है। नितिन नबीन के जरिरए कायस्थ और बिहारी दोनों मतदाताओं को भाजपा मैसेज दे रही है। यह बहुत शुरुआती स्टेज है लेकिन भाजपा के कई नेताओं का मानना है कि चुनाव जैसे जैसे नजदीक आएगा वैसे वैसे नितिन नबीन के दौरे बढ़ेंगे और वे प्रचार के केंद्र में होंगे। भाजपा को लग रहा है कि उनके ऊपर ममता बनर्जी बाहरी का आरोप भी नहीं लगा पाएंगी। ध्यान रहे पश्चिम बंगाल में हिंदी भाषी लोगों की आबादी अब 25 फीसदी से ज्यादा हो गई है।


