लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया और प्रधानमंत्री आवास से थोड़ी दूरी पर प्रदर्शन किया। इसे लेकर ऐसा हल्ला मचा है, जैसे यह पहली बार हुआ हो। भाजपा के नेताओं को सब पता है कि पहले भी प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन होते रहे हैं और यह कोई बहुत बड़ा मसला नहीं है। लेकिन नरेंद्र मोदी को भाजपा ने और मीडिया में भी ऐसी ऊंचाई पर बैठा दिया है कि उनके खिलाफ प्रदर्शन को सब गलत मिसाल बता रहे हैं। ऐसा प्रोजेक्ट किया जा रहा है, जैसे राहुल गांधी ने बहुत बड़ा पाप कर दिया हो। असल में खुद भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के सामने प्रदर्शन किया है। अटल बिहारी वाजपेयी नेता प्रतिपक्ष रहते प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे। वह धरना तो प्रधानमंत्री आवास के ठीक बाहर हुआ था।
मामला 1998 का है, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी ने कल्याण सिंह की सरकार बरखास्त कर दी थी। उस समय कांग्रेस टूटी थी और लोकतांत्रिक कांग्रेस का गठन हुआ था, जिसके नेता जगदम्बिका पाल एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बने थे। बहरहाल, कल्याण सिंह की सरकार बरखास्त किए जाने के विरोध में भाजपा ने दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने का फैसला किया। उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अटल बिहारी वाजपेयी थे और प्रधानमंत्री आईके गुजराल थे। वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया। सारे नेता सात, रेसकोर्स रोड के बाहर धरने पर बैठे। सबसे अच्छी बात यह है कि खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल बाहर आए और अटल बिहारी वाजपेयी से मिल कर उनकी बात सुनी और उनका धरना खत्म कराया। सबको पता है कि उसी साल यानी 1998 के लोकसभा चुनाव में भाजपा लगातार दूसरी बार सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी और अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। उनकी सरकार 13 महीने चली थी और उसके बाद जो सरकार बनी वह पांच साल चली।
इसके बाद भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आवासों के बाहर प्रदर्शन हुए। 2012 में तो निर्भया कांड के बाद युवाओं ने इंडिया गेट पर कब्जा कर लिया था और रायसीना की पहाड़ियों के ऊपर तक जाकर घंटों राष्ट्रपति भवन के दरवाजे झकझोरते रहे थे। तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे लगातार पुलिस को निर्देश देते रहे थे कि युवाओं पर कोई कार्रवाई नहीं करनी है। यह तब हो रहा था निर्भया कांड के आरोपी पकड़े जा चुके थे। सोनिया गांधी खुद अस्पताल जाकर निर्भया से मिली थीं और सरकार ने उसे इलाज के लिए सिंगापुर भेजा था। इस बार तो सरकार ने छात्रों से बात भी नहीं की और उनके प्रदर्शन पर लाठीचार्ज करा दिया था। तब राहुल गांधी पीएम आवास गए तो ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जैसे उन्होंने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो। हां, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जो नाटक किया वह नया था। वे जमीन पर लेट गए और पुलिस ने उनके हाथ, पैर पकड़ कर उठाया। ऐसा पहले किसी नेता प्रतिपक्ष को करते नहीं देखा गया था। पहले भी नेता प्रदर्शन करते थे और जब पुलिस आती थी तो वे चुपचाप जाकर गाड़ी में बैठ जाते थे। राहुल ने पुलिस को मजबूर किया कि वे उन्हें घसीट कर बस में बैठाएं। ऐसा 1978 में राहुल के चाचा संजय गांधी ने किया था। वे इसी तरह से एक प्रदर्शन के दौरान सड़क पर लेट गए थे और पुलिस उनको उठा कर ले गई थी।
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