यह बड़ा सवाल है और इसलिए है क्योंकि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद जो मसौदा सूची जारी हुई उसमें बताया गया है कि दिल्ली के 47 लाख से कुछ ज्यादा मतदाताओं के नाम कटे हैं। पहले कुल एक करोड़ 45 लाख 10 हजार से कुछ ज्यादा मतदाता थे। 47 लाख से कुछ ज्यादा नाम कटने के बाद मसौदा सूची में 97 लाख 53 हजार से कुछ ज्यादा वोटर बचे हैं। लेकिन यह असली आंकड़ा नहीं है। असली आंकड़ा कुछ अलग है और यह हैरान करने वाला है कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में लोगों के नाम कटने शुरू हो गए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में जनवरी 2025 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से लेकर जून 2026 में एसआईआर शुरू होने तक करीब 11 लाख लोगों के नाम कट गए थे। इस तरह से कह सकते हैं कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद से दिल्ली में कुल 58 लाख से ज्यादा लोगों के नाम कट चुके हैं। इसके बावजूद राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सोशल मीडिया में एक एक पोस्ट लिख कर शांत हो गए हैं।
बहरहाल, एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2025 के विधानसभा चुनाव के समय दिल्ली के मतदाताओं की कुल संख्या एक करोड़ 56 लाख थी। इसमें से 11 लाख मतदाताओं के नाम कट गए और मई व जून में एसआईआर से पहले मैपिंग के दौरान तीन लाख नए मतदाता जुड़े। बाद में मसौदा सूची आई तो उसमें 47 लाख नाम और कट गए। यह बहुत असामान्य बात है कि विधानसभा चुनाव के बाद अचानक मतदाताओं की संख्या घटने लगी। इसके उलट 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद 2025 के विधानसभा चुनाव के बीच चार लाख नए मतदाता जुड़े थे। लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद 11 लाख मतदाता कम हो गए। अभी इस तरह की रिपोर्ट सिर्फ दिल्ली को लेकर आई है। लेकिन तेलंगाना से लेकर महाराष्ट्र तक कई राज्यों में अलग अलग किस्म की असामान्यता दिख रही है। तभी दीपांकर भट्टाचार्य विपक्ष की बैठक बुला कर एसआईआर की गड़बड़ियों के मुद्दे पर देशव्यापी आंदोलन की मांग कर रहे हैं। लेकिन कांग्रेस को इस मुद्दे में कोई संभावना नहीं दिख रही है।
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