सूचना के अधिकार की ताकत के सहारे देश के लोगों को यह तो पता चल गया कि रेलवे स्टेशनों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सेल्फी के लिए जो प्वाइंट बनाए जा रहे हैं उनके ऊपर कितना खर्च आ रहा है लेकिन उसका नुकसान यह हुआ है कि अब देश के लोगों को रेलवे के बारे में अन्य सूचनाएं हासिल करना कठिन हो गया है। असल में मध्य रेलवे के एक डिप्टी जनरल मैनेजर अभय मिश्रा ने रेलवे के ही एक पूर्व कर्मचारी के आवेदन पर बताया था कि 3डी सेल्फी प्वाइंट बनाने पर साढ़े छह करोड़ और अस्थायी सेल्फी प्वाइंट बनाने पर डेढ़ लाख रुपए का खर्च आ रहा है। सूचना मिलने के बाद यह खबर अखबारों में छप गई और देश को पता चल गया कि इस पर कितने रुपए खर्च हुए हैं।
यह बात अखबारों में छपने के दो दिन के अंदर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी मानसपुरे का तबादला हो गया। उनकी नियुक्ति के अभी सिर्फ सात महीने हुए थे। आमतौर पर रेलवे में पोस्टिंग दो साल की होती है। हालांकि रेलवे ने कहा है कि उनके तबादले को इस घटना से जोड़ कर नहीं देखा जाए लेकिन सबको पता है कि उनको तबादले का यही कारण है। इसके साथ ही अब यह नियम लागू कर दिया गया है कि रेलवे में सूचना अधिकार के तहत आने वाले किसी भी आवेदन का जवाब जनरल मैनेजर से नीचे के स्तर का कोई अधिकारी नहीं देगा।
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