सरकारी कामकाज में घूसखोरी कोई नई बात नहीं है और न हैरान करने वाली है। लेकिन पहले से रिश्वतखोरी के लिए बदनाम विभागों की बजाय नए विभागों से घूसखोरी की खबरें आएं और लोग पकड़े जाएं तो हैरानी होती है। पिछले हफ्ते की दो खबरें इस लिहाज से हैरान करने वाली थीं। एक खबर रक्षा विभाग में भारी घूसखोरी की थी और दूसरी दूतावास यानी भारत के विदेश के एक मिशन कार्यालय में घूसखोरी की थी। दोनों मामलों में करोड़ों रुपए की गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। खबर है कि जेनेवा में भारत के पूर्व लेखा अधिकारी मोहित के ऊपर दो लाख स्विस फ्रैंक यानी करीब दो करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप है। सीबीआई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
उससे पहले रक्षा मंत्रालय में रक्षा उत्पादन विभाग में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। उनको तीन लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। रिश्वत देने वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके घर पर हुई तलाशी में सीबीआई ने दो करोड़ 36 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं। आरोप है कि शर्मा और उनकी पत्नी कंपनियों को ठेका दिलाने या सामान की सप्लाई की मंजूरी दिलाने में मदद करते थे और बदले में पैसे लेते थे। जिस मामले से इसका भंडाफोड़ हुआ वह भी दुबई की एक कंपनी को सामान की आपूर्ति के लिए विदेश मंत्रालय से मंजूरी दिलाने का था। आमतौर पर राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों को होली काऊ माना जाता है और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है। लेकिन दो मामले बैक टू बैक सामने आए हैं।


