दिल्ली की राउडज एवेन्यू कोर्ट ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया और राहुल गांधी सहित कांग्रेस पार्टी के पूरे नेतृत्व को बड़ी राहत दी। नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस के और भी कई नेता पंसे हैं। लेकिन राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज विशाल गोगने ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की ओर से दायर आरोपपत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जज विशाल गोगने ने कहा कि बिना किसी एफआईआर के और निजी शिकायत पर ईडी ने जांच की है इसलिए उसके आरोपपत्र का संज्ञान नहीं लिया जा सकता है। इस मामले में ईडी हाई कोर्ट गई है, जहां से सोनिया और राहुल गांधी को नोटिस जारी हुआ है।
सोनिया और राहुल गांधी को राहत देने वाले जज विशाल गोगने ही रेलवे में जमीन के बदले नौकरी मामले की सुनवाई कर रहे हैं। लालू प्रसाद के परिवार ने उनके खिलाफ पक्षपात का आरोप लगाया है। राबड़ी देवी ने उनकी कोर्ट से केस हटान की अपील की थी, जिसे जिला और सत्र न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। अब इस मामले में नौ जनवरी को लालू प्रसाद और राबड़ी देवी सहित पूरे परिवार की पेशी है, जिसमें आरोप तय किए जाएंगे। सोचें, जिस जज ने कांग्रेस नेताओं को राहत दी उसी जज पर राजद नेताओं ने पक्षपात का आरोप लगाया। अगर जज विशाल गोगने की कोर्ट में आरोप तय हो जाते हैं और फास्ट ट्रैक सुनवाई के बाद सजा हो जाती है तो विपक्षी पार्टियां क्या कहेंगी? क्या इसके बाद भी वे पक्षपात और राजनीतिक बदले की कार्रवाई का आरोप लगाएंगे?


