मध्य प्रदेश में कांग्रेस के एक विधायक राजेंद्र भारती के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत ने सजा सुनाई और उसी दिन आधी रात को विधानसभा का सचिवालय खुलवा कर उनकी सदस्यता समाप्त की गई। दतिया के विधायक राजेंद्र भारती को बैंक फ्रॉड के एक केस में दिल्ली की अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई है। उनको अयोग्य ठहराने का मामला कई वजह से दिलचस्प है। एक तो यह तथ्य है कि उन्होंने दतिया में भाजपा के दिग्गज और मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे नरोत्तम मिश्रा को हराया। दूसरी खास बात यह है कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा के चुनाव होने वाले हैं, जिसमें एक एक वोट की कीमत होगी। हालांकि कांग्रेस के 66 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत होगी। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह रिटायर हो रहे हैं और भाजपा की दो सीटें खाली हो रही हैं। अगर कोई बडा उलटफेर न हो तो कांग्रेस को एक सीट मिल जाएगी।
बहरहाल, राजेंद्र भारती का मामला इसलिए दिलचस्प है कि उनको दिल्ली में दो अप्रैल को सजा सुनाई गई और उस दिन आधी रात को सचिवालय खोल कर उनको अयोग्य ठहराने की अधिसूचना जारी हुई। जब अगले दिन इस बारे में स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर से पूछा गया तो उनको यहां तक पता नहीं था कि राजेंद्र भारती को सजा होने की सूचना किसने दी। उन्होंने कहा कि किसी गौतम नाम के आदमी ने सूचना दी। उनको पूरा नाम ध्यान नहीं था। सोचें, गौतम न तो सरकार का वकील है और न कोई सरकारी कर्मचारी है। तोमर का कहना है कि हर नागरिक का अधिकार है सूचना देना। इसका मतलब कि एक नागरिक के सूचना देने पर विधायक की सदस्यता समाप्त कर दी जाएगी! बहरहाल, राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाई कोर्ट में सजा रोकने की अपील की है। साथ ही मध्य प्रदेश विधानसभा को उनकी सीट खाली नहीं घोषित करने की भी अपील की है। उत्तर प्रदेश के विक्रम सैनी सहित भाजपा विधायकों के मामले में कभी इतनी तत्परता नहीं दिखाई गई। उन्हें अपील का मौका दिया गया, जबकि राहुल गांधी को भी सजा होते ही सदस्यता समाप्त कर दी गई।
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