शरद पवार और उनके भतीजे अजित पवार की पार्टियों का विलय होगा। यह सिर्फ समय की बात है। जानकार सूत्रों का कहना है कि मार्च में राज्यसभा चुनाव से पहले इसकी घोषणा हो सकती है क्योंकि दोनों पार्टियों को तय करना है कि शरद पवार राज्यसभा जाएंगे या रिटायर होंगे। वैसे महाराष्ट्र के विपक्षी गठबंधन के पास भी इतनी संख्या हो जाती है कि वह एक सदस्य को राज्यसभा भेज सके। लेकिन गठबंधन की तीन पार्टियों में शरद पवार की पार्टी सबसे छोटी है। राज्यसभा सीट पर उद्धव ठाकरे की शिव सेना और कांग्रेस दोनों दावा करेंगे। दूसरी ओर पवार परिवार में सिद्धांत रूप में एकजुटता पर सहमति बन गई है।
महाराष्ट्र की नगरपालिकाओं के चुनाव के बाद पवार परिवार की बारामती में अहम बैठक हुई, जिसमें विलय के बारे में बातचीत हुई। जानकार सूत्रों का कहना है कि पवार परिवार में इस बात पर सहमति बन गई है कि दोनों पार्टियों का विलय होगा तब भी पार्टी एनडीए के साथ ही रहेगी। यानी अजित पवार राज्य सरकार में उप मुख्यमंत्री बने रहेंगे। अगर ऐसा होता है तो यह कांग्रेस गठबंधन के लिए बड़ा झटका होगा। कहा जा रहा है कि गठबंधन के बाद प्रदेश की राजनीति अजित पवार के हाथ में होगी और केंद्र की राजनीति शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले संभालेंगी। उनको केंद्र में मंत्री भी बनाया जा सकता है। हालांकि ऐसे में प्रफुल्ल पटेल क्या करेंगे और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार क्या करेंगी, जिनको अजित पवार ने राज्यसभा में भेजा है। परिवार और पार्टी में इसका विरोध हो सकता है। बहरहाल, संभव है कि राज्यसभा चुनाव तक यह फैसला हो और नरेंद्र मोदी सरकार में फेरबदल भी उसके बाद ही हो।


