अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को एक्सपोज किया है। पता नहीं उनको क्या खुन्नस है कि भारत में जिन बातों पर परदा डालने की कोशिश होती है वे उस पर से परदा हटा देते हैं। पाकिस्तान के साथ सीजफायर वाले मामले को तो उन्होंने अभी तक नहीं छोड़ा है। वे हर मंच पर यह जरूर बताते हैं कि उन्होंने टैरिफ की धमकी देकर युद्ध बंद कराया था। अब उन्होंने रूस से तेल खरीदने के मामले पर भी भारत की ओर से डाले जा रहे परदे को हटा दिया है। उन्होंने बताया है कि अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस से तेल खरीदना कम किया है और अब रूस ने अपनी जरुरत के लिए भारत को तेल खरीदने का अनुमति दी है। सोचें, यह कैसी बात है कि अमेरिका कह रहा है कि उसने भारत को 30 दिन की राहत दी है।
अमेरिका ने कहा है कि रूस से तेल खरीद कर पांच मार्च तक जो तेल टैंकर में लोड हो गया था उसे भारत तीन अप्रैल तक अपने यहां ला सकता है। यह बहुत अपमानजनक है कि एक संप्रभु देश को दूसरा देश इस तरह से निर्देश दे रहा है। लेकिन भारत में इसका जश्न मनाया जा रहा है। ध्यान रहे भारत ने बार बार कहा कि उसने अमेरिका के दबाव में रूस से तेल खरीदना कम नहीं किया है। भाजपा के करीबी पत्रकार और विश्लेषक बताने लगे कि रूस से तेल खरीदना पहले जितना फायदेमंद नहीं रहा इसलिए भारत ने कम कर दिया। यह भी कहा गया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के हिसाब से तेल खरीदना जारी रखेगा। लेकिन अब सचाई सामने आ गई है। अब जबकि अमेरिकी अनुमति से भारत अपना तेल रूस से ले आएगा तो अपनी ऊर्जा जरुरतों के हिसाब से तेल खरीदने की बात का कोई मतलब नहीं रह गया। अमेरिका ने बता दिया कि भारत उसके निर्देशों के हिसाब से तेल खरीद रहा है।


