यह कमाल की बात है कि कांग्रेस का कोई नेता पाकिस्तान के नई दिल्ली स्थिति उच्चायोग में जाकर वहां के उच्चायुक्त या किसी अन्य राजनियक से मिल ले तो हंगामा मच जाता है। भारतीय जनता पार्टी के साथ साथ राइटविंग के हर लेखक, पत्रकार की भावनाएं आहत हो जाती हैं। उस नेता को देशद्रोही ठहराया जाता है। उसके आधार पर कांग्रेस का कैरेक्टर जज किया जाता है। लेकिन भाजपा के नेता दूसरे देश में पाकिस्तानी नेताओं, राजनयिक और सैन्य अधिकारियों से मिलते हैं तो किसी की भावना आहत नहीं होती है। बहस इस बात की नहीं है कि सरकार कोई ट्रैक टू डिप्लोमेसी कर रही है या नहीं कर रही है। सवाल है कि थिंक टैंक के बहाने ही भाजपा के नेता और रिटायर अधिकारी क्यों पाकिस्तान के लोगों से मिल रहे हैं और उनसे बात कर रहे हैं? दूसरे देश में पाकिस्तानियों से मिलने वाले भारतीयों को क्यों नहीं देशद्रोही ठहराया जा रहा है?
सरकार की ओर से सिर्फ इतना कहा गया है कि श्रीलंका में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडी यानी आईआईएसएस के कार्यक्रम में भारत के जो नेता और पूर्व अधिकारी पाकिस्तानी नेताओं और पूर्व अधिकारियों से मिले हैं वह ट्रैक टू डिप्लोमेसी नहीं है। क्या इतना बयान देने से मामला समाप्त हो गया? राम माधव भाजपा के कोई छोटे नेता नहीं हैं। वे कई साल पहले पार्टी के महासचिव रहे हैं। वे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रवक्ता रहे हैं। प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि रहे हैं।
इसी तरह एमएम नरवणे भारतीय थल सेना के प्रमुख रहे हैं और रूचि घनश्याम भारत की राजनयिक हैं, जो पाकिस्तान में भी रह चुकी हैं। इन लोगों ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में काम कर रहे डायरेक्टर जनरल स्तर के अधिकारी सज्जाद हैदर खान से मुलाकात की। इस मुलाकात में पीपुल्स पार्टी की नेता शेरी रहमान और रिटायर मेयर जनरल इस्फंदियार अली खान पटौदी भी शामिल थे। शेरी रहमान अमेरिका में पाकिस्तान की राजदूत रही हैं। खबर यह भी है कि आईआईएसएस के जरिए भारत और पाकिस्तान के पूर्व अधिकारियों व नेताओं की वार्ता पहले से चल रही है। लेकिन राम माधव, नरवणे या रूचि घनश्याम के पाकिस्तानियों से मिलने और वार्ता करने से राइटविंग के किसी व्यक्ति को कोई परेशानी नहीं है। उम्मीद करनी चाहिए कि आगे किसी और पार्टी के लोग पाकिस्तानियों से मिलेंगे तो उसमें भी परेशानी नहीं होगी।


