पाकिस्तान का क्षण, भारत का आईना
पिछले एक दशक से नई दिल्ली ने खुद को एक उभरती शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसके वैश्विक संबंध रणनीतिक प्रभाव में बदलेंगे।..पर कूटनीति भाषणों, कहानियों की प्रतियोगिता नहीं है, वह प्रासंगिकता की परीक्षा है, और जब दुनिया को एक रास्ते की ज़रूरत थी, उसने उसी देश को चुना जो संदेश पहुँचा सकता था, बिना खुद को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए। सन् 2026 की वसंत में दुनिया ने एक ऐसा कूटनीतिक उलटफेर देखा, जिसकी कुछ महीने पहले तक कल्पना भी मुश्किल थी, क्योंकि इस्लामाबाद में वाशिंगटन और तेहरान के अधिकारी आमने-सामने बैठे थे, यह परखने के लिए कि एक नाज़ुक...