केरल में अगले महीने विधानसभा का चुनाव होना है। सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एलडीएफ के लिए बहुत कठिन मुकाबला है क्योंकि 10 साल से उसकी सरकार है। उसके खिलाफ एंटी इन्कम्बैंसी का माहौल है और लोकसभा चुनाव के बाद नगर निकाय चुनावों में भी पार्टी बुरी तरह से हारी है। ध्यान रहे पिछली बार हर पांच साल पर सत्ता बदलने की परंपरा टूटी थी और लेफ्ट ने लगातार दूसरी बार चुनाव जीता था। लेकिन उसके बाद से हालात लगातार बदल रहे हैं। सीपीएम के अंदर उसकी रैंक एंड फाइल में बहुत नाराजगी है। कट्टर हिंदुवादी नेताओं के साथ मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन की नजदीकी से भी पार्टी के अंदर नाराजगी है और वोटर भी नाराज हैं।
इस बीच सीपीएम के एक बड़े नेता जी सुधाकरण ने पार्टी छोड़ दी है। वे अलापुझा इलाके के बड़े नेता हैं और अम्बलापुझा सीट से दो बार विधायक रहे हैं। वे छह दशक से सीपीएम से जुड़े थे। उनसे पहले पीवी अनवर ने एलडीएफ का साथ छोड़ा था। वे भी दो बार के निर्दलीय विधायक थे, जिन्हें सीपीएम का समर्थन था। वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं और प्रदेश की कमान संभाल रहे हैं। तभी माना जा रहा है कि अलापुझा जैसे मजबूत गढ में अगर सीपीएम में सेंध लग रही है तो उसके लिए इस बार की लड़ाई पिछली बार के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुश्किल है।
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