कांग्रेस पार्टी जिन बातों को लेकर भाजपा के ऊपर हमला करती है, जब खुद वही काम करती है तो फिर उसका ही नहीं पूरे विपक्ष का एजेंडा कमजोर पड़ता है। ताजा मामला केरल में मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त करना का है। कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो उसके मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी रहे रतन यू केलकर को अपना सचिव नियुक्त किया। सोचें, केलकर की देखरेख में ही केरल का चुनाव हुआ था। लेकिन चुनाव खत्म होते ही कांग्रेस ने उनको सीएम का सचिव नियुक्त कर दिया। इसके बाद चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे वोट चोरी और चुनाव में गड़बड़ी के सारे आरोप अपने आप हवा में उड़ गए। विपक्ष के हाथ से एक बड़ा मुद्दा निकल गया।
ध्यान रहे पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ साथ कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के नेता इस बात का मुद्दा बना रहे थे कि चुनाव आय़ोग के केंद्रीय पर्यवेक्षक रहे सुब्रत गुप्ता को राज्य सरकार का सलाहकार बनाया गया है और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी रहे मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। सोचें, भाजपा की सरकार ने तो मुख्य चुनाव अधिकारी को मुख्य सचिव बनाया केरल में तो कांग्रेस ने तो मुख्य चुनाव अधिकारी को सीएम का ही सचिव नियुक्त कर दिया। इसके बाद भाजपा हमलावर हो गई। वह आरोप लगा रही है कि क्या कांग्रेस वोट लूट कर चुनाव जीती है और उसी के इनाम में केलकर को सीएम का सचिव बनाया गया है?
इस तरह कांग्रेस ने अपना ही नहीं विपक्ष के एजेंडे को स्थायी रूप से पंक्चर कर दिया। अब जब भी भाजपा किसी अधिकारी को उपकृत करेगी तो विपक्ष सवाल नहीं उठा पाएगा और उठाएगा तो उसके केरल की याद दिलाई जाएगी। जैसे अभी एमएस गिल से लेकर नवीन चावला तक की याद दिलाई जाती है। ध्यान रहे कांग्रेस ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे एमएस गिल को रिटायर होने के बाद राज्यसभा भेजा था और मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री बनाया था।
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