सोचें, केंद्रीय मंत्री का कद और पद कितना बड़ा होता है लेकिन कांग्रेस केंद्रीय मंत्रियों को चुनाव में उतारती रहती है और वे हारते रहते हैं। मध्य प्रदेश के पिछले चुनाव में कई केंद्रीय मंत्री चुनाव में उतरे थे, जिनमें से एक फग्गन सिंह कुलस्ते चुनाव हार गए थे। उससे पहले केंद्रीय मंत्री रहते निशीथ प्रमाणिक पश्चिम बंगाल में विधानसभा का चुनाव लड़े थे और हार गए थे। इस बार और कमाल हुआ है। भाजपा ने अपने दो केंद्रीय मंत्रियों को विधानसभा चुनाव लड़ाया। दोनों राज्यसभा सांसद हैं और अपने राज्य की बजाय इनको दूसरे राज्य मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया है और दोनों केंद्रीय मंत्री अपने राज्य में विधानसभा का चुनाव हार गए।
भाजपा ने तमिलनाडु के एल मुरुगन को और केरल के जॉर्ज कुरियन को विधानसभा का चुनाव लड़ाया था। संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुरुगन तमिलनाडु के अवनाशी सीट से चुनाव लड़े थे, जबकि कुरियन केरल की कांजीरापल्ली सीट से चुनाव लड़े थे। दोनों अपनी अपनी सीटों पर चुनाव हार गए। तमिलनाडु में तो पिछली बार भाजपा 20 सीटों पर लड़ कर चार जीत गई थी लेकिन इस बार 27 पर लड़ कर एक सीट जीत पाई है। केरल में पिछली बार भाजपा का खाता नहीं खुला था लेकिन इस बार न सिर्फ खाता खुला है, बल्कि उसके तीन विधायक जीत गए हैं। तमिलनाडु में पूर्व राज्यपाल तमिलसाई सौंद्रयराजन भी चुनाव हार गईं।
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