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ठाणे में उद्धव की जीत का मतलब

उद्धव ठाकरे की शिव सेना के लिए पिछले कुछ दिन अच्छे नहीं रहे हैं। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी और पूरे महाविकास अघाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन उसके बाद सब कुछ बिगड़ गया। विधानसभा चुनाव में पूरा गठबंधन बुरी तरह से हारा। उद्धव की पार्टी के सिर्फ 16 विधायक जीते। इसके बाद पिछले दिनों नगर पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव हुए और उसमें भी उद्धव की पार्टी बुरी तरह से हारी। अब बीएमसी सहित 29 नगर निकायों के चुनाव हैं।

उद्धव की पार्टी की लिए बीएमसी लाइफ लाइन की तरह है। तभी सारे गिले शिकवे भूल कर उद्धव ने राज ठाकरे के साथ तालमेल किया है। 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी चुनाव से पहले उद्धल को बड़ी कामयाबी मिली है। ठाणे नगर निगम चुनाव में उनकी पार्टी के साथ पार्षद निर्विरोध जीत गए हैं। ध्यान रहे ठाणे एकनाथ शिंदे का गढ़ है। उन्होंने वहीं से अपनी राजनीति शुरू की थी। अगर वहां उद्धव के उम्मीदवार निर्विरोध जीते हैं तो इसका बड़ा मनोवैज्ञानिक असर मुंबई में भी होगा। मुंबई में शिंदे की पार्टी भाजपा के साथ तालमेल करके 90 सीटों पर लड़ रही है। ठाणे की खबर मुंबई में शिव सैनिकों को उद्धव व राज ठाकरे के पक्ष में एकजुट कर सकती है। गौरतलब है कि इस बार वहां असली शिव सेना की परीक्षा होनी है।

By NI Political Desk

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