Uddhav Thackeray

  • उद्धव की पार्टी की एक सीट का पेंच

    ऐसा लग रहा है कि महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन यानी महाविकास अघाड़ी को राज्यसभा की जो एक सीट मिलेगी वह उद्धव ठाकरे की शिव सेना के खाते में जाएगी। पार्टी की ओर से इस बारे में बहुत साफ शब्दों में दोनों गठबंधन सहयोगियों को बता दिया गया है। उद्धव ठाकरे की शिव सेना के नेता संजय राउत ने कहा कि राज्यसभा की एक सीट पर उनकी पार्टी का अधिकार है। ध्यान रहे उनकी पार्टी की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। जानकार सूत्रों का कहनी है कि संजय राउत नहीं चाहते हैं कि इस बार सीट...

  • ब्रांड ठाकरे-पवार का क्या होगा?

    महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के बाद यह सबसे बड़ा सवाल है कि अब ब्रांड ठाकरे और पवार का क्या होगा? इस बार दोनों ने परिवार का ब्रांड बचाने के लिए कई उपाय किए थे। इनमें एक उपाय यह भी था कि अहंकार छोड़ कर दोनों परिवार एक हुए थे। ठाकरे बंधु 20 साल के बाद साथ आए थे तो पवार चाचा भतीजे ने भी हाथ मिलाया था। उद्धव और राज ठाकरे को मुंबई का किला बचाना था तो पवार चाचा भतीजे को पुणे, पिंपरी चिंचवाड़ और परभणी में परिवार का पुराना गढ़ वापस हासिल करना था। दोनों परिवारों को...

  • उद्धव ठाकरे ने लगाया कोताही बरतने का आरोप

    शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को चुनाव आयोग पर महानगर पालिका के चुनाव में अव्यवस्था बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया इस चुनाव में इतनी शिकायतें हमें सुनने को मिली है, जितना किसी भी चुनाव में नहीं मिली। इस तरह की स्थिति एक लोकतांत्रिक प्रणाली में बिल्कुल ठीक है।   उद्धव ठाकरे ने प्रेसवार्ता में कहा कि महाराष्ट्र नगरपालिका के चुनाव में मतदाताओं के हाथों में इंक लगाई जा रही है, जिससे यह जाहिर हो सके कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके हैं। मुझे भी व्यक्तिगत तौर पर इस संबंध में कई शिकायतें मिल चुकी हैं,...

  • उद्धव और राज का साझा घोषणापत्र

    मुंबई। महाराष्ट्र में बृहन्नमुंबई महानगर निगम यानी बीएमसी के साथ 29 शहरों में नगर निगम के चुनाव 15 जनवरी को होने वाले हैं। उससे पहले रविवार, चार जनवरी को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने बीएमसी चुनाव के लिए साझा घोषणापत्र जारी किया। घोषणापत्र जारी करने के लिए 20 साल के बाद पहली बार राज ठाकरे शिव सेना भवन पहुंचे। शिव सेना से अलग होने और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से अपनी पार्टी बनाने के बाद पहले बार वे शिव सेना भवन पहुंचे। गौरतलब है कि आठ साल के बाद हो बीएमसी चुनाव के लिए दोनों भाई साथ आए हैं।...

  • ठाणे में उद्धव की जीत का मतलब

    उद्धव ठाकरे की शिव सेना के लिए पिछले कुछ दिन अच्छे नहीं रहे हैं। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी और पूरे महाविकास अघाड़ी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। लेकिन उसके बाद सब कुछ बिगड़ गया। विधानसभा चुनाव में पूरा गठबंधन बुरी तरह से हारा। उद्धव की पार्टी के सिर्फ 16 विधायक जीते। इसके बाद पिछले दिनों नगर पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव हुए और उसमें भी उद्धव की पार्टी बुरी तरह से हारी। अब बीएमसी सहित 29 नगर निकायों के चुनाव हैं। उद्धव की पार्टी की लिए बीएमसी लाइफ लाइन की तरह है। तभी सारे गिले शिकवे भूल कर...

  • उद्धव और राज ठाकरे एलायंस का ऐलान किया

    मुंबई। बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी चुनाव की अधिसूचना जारी होने और नामांकन शुरू होने के एक दिन बाद बुधवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने साथ मिल कर चुनाव लड़ने का ऐलान किया। 20 साल के बाद दोनों एक साथ मिल कर चुनाव लड़ेंगे। गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे को शिव सेना की कमान सौंपे जाने के बाद राज ठाकरे 2005 में अलग हो गए थे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया था। अब बाल ठाकरे की शिव सेना भी टूट चुकी है और चुनाव आयोग व स्पीकर ने एकनाथ शिंदे की पार्टी को असली शिव सेना माना...

  • बीएमसी चुनावों के लिए उद्धव और राज ठाकरे ने मिलाया हाथ

    शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के संस्थापक राज ठाकरे ने बुधवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और नासिक नगर निगम के आगामी चुनावों के लिए औपचारिक रूप से गठबंधन की घोषणा कर दी। दोनों का साथ आना मराठी वोट बैंक को मजबूत करने और भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति को चुनौती देने के उद्देश्य से एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन का संकेत है।  दोनों चचेरे भाइयों ने दादर के छत्रपति शिवाजी पार्क में शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के स्मारक पर श्रद्धांजलि देने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की औपचारिक जानकारी दी। राज ठाकरे ने...

  • मनसे की ज्यादतियों का जवाब उद्धव को देना होगा

    महाराष्ट्र में राज ठाकरे पूरी तरह से पस्त पड़े थे। भाजपा उनका इस्तेमाल करती थी लेकिन कभी ताकतवर नहीं बनाया। लेकिन उद्धव ठाकरे ने उनको पुनर्जीवित कर दिया है। बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का चुनाव जीतने के लिए उद्धव ठाकरे बेचैन हैं और उनको लग रहा है कि बिना राज ठाकरे के वे यह चुनाव नहीं जीत पाएंगे। राज ठाकरे के लिए वे कांग्रेस को छोड़ने के लिए भी तैयार हैं, जबकि मुंबई में कांग्रेस के पास राज ठाकरे की मनसे से ज्यादा वोट हैं। बहरहाल, उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई के साथ तालमेल की बात आगे बढ़ा दी...

  • उद्धव क्या गडकरी से मिलेंगे?

    महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिव सेना यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे दिल्ली आ रहे हैं। वे राहुल गांधी की ओर से बुलाई गई विपक्षी नेताओं की बैठक में हिस्सा लेंगे। राहुल ने सात अगस्त को बैठक बुलाई है। लंबे अरसे बाद ‘इंडिया’ ब्लॉक की एक बड़ी बैठक होने जा रही है। यह बैठक राहुल गांधी के नए बंगले पांच, सुनहरी बाग लेन में होगी। कई लोग इसको राहुल के नए बंगले का गृह प्रवेश भी बता रहे हैं और मीटिंग को गृह प्रवेश का भोज कह रहे हैं। जो हो लेकिन इस बार की मीटिंग में विपक्षी गठबंधन के...

  • ठाकरे परिवार की एकता मजबूत हो रही है

    बाल ठाकरे का परिवार सिर्फ राजनीतिक स्तर पर ही नहीं बिखरा था, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी बिखर गया था। राजनीतिक कारणों से ही ऐसा हुआ था और अब राजनीतिक कारणों से ही परिवार की एकता भी बन रही है। पिछले दिनों उद्धव ठाकरे का 65वां जन्मदिन मनाया गया तो उसमें शामिल होने के लिए राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे। वे छह साल के बाद मातोश्री गए थे। एक समय पूरा परिवार वही रहता था और मुंबई पर राज करता था। लेकिन उद्धव ठाकरे को शिव सेना की कमान देने के बाद सब बिखर गया। राज ठाकरे को मातोश्री...

  • फड़नवीस, शिंदे और उद्धव की राजनीति

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की राजनीति की परतें खुल नहीं रही हैं। किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि परदे के पीछे क्या चल रहा है। सामने जो हो रहा है उसे लेकर तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन एक तरफ उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री फड़नवीस के प्रति सद्भाव दिखा रहे हैं, उनसे मिल रहे हैं तो दूसरी ओर भाजपा की केंद्र सरकार पर हमला भी कर रहे हैं। उनका ताजा बयान पहलगाम कांड को लेकर है। उन्होंने कहा कि पहलगाम और ऑपरेशन सिंदूर के बाद...

  • उद्धव की राजनीति से कांग्रेस भी परेशान

    ऐसा नहीं है कि उद्धव ठाकरे की राजनीति से सिर्फ सत्तारूढ़ गठबंधन यानी महायुति में टकराव बढ़ा है। उद्धव की राजनीति के कारण विपक्षी गठबंधन यानी महाविकास अघाड़ी में भी उथल पुथल मची है। कांग्रेस पार्टी अलग परेशान है कि उद्धव के साथ तालमेल को आगे बढ़ाया जाए या उसे विराम दिया जाए। कांग्रेस को परेशानी इस बात से नहीं है कि उद्धव ठाकरे पिछले कुछ दिनों से लगातार मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से मिल रहे हैं और दोस्ती बढ़ा रहे हैं। इसमें कोई परेशान होने की बात नहीं है, जब तक वे भाजपा का विरोध करते हैं और केंद्र सरकार...

  • सीएम फड़नवीस से मिले उद्धव

    मुंबई। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपनी तरफ आ जाने को कहा था और उसके बाद गुरुवार को उद्धव की फड़नवीस से मुलाकात हुई है। उद्धव ने विधान परिषद के सभापति राम शिंदे के कक्ष में देवेंद्र फड़नवीस से मुलाकात की। करीब आधे घंटे तक चली इस मुलाकात में उद्धव के बेटे और वर्ली के विधायक आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। चूंकि यह मुलाकात फड़नवीस के ओर से उद्धव को दिए ऑफर के एक दिन बाद हुई है इसलिए राजनीतिक अटकलें शुरू हो गई हैं। हालांकि बताया जा रहा है...

  • भाषा, जाति, धर्म पर गुंडागर्दी का गौरवगान

    देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने ‘मराठी विजय रैली’ की। इस रैली पर पूरे देश की नजर थी क्योंकि इससे महाराष्ट्र की राजनीति में एक बदलाव का संकेत मिल रहा था। कम से कम मुंबई की राजनीति तो निश्चित रूप से बदलती दिख रही है। इस राजनीतिक बदलाव के केंद्र में भाषा का विवाद है। यह बहुत पुराना विवाद है। कम से कम 75 साल पहले जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भाषा के नाम पर राज्यों के विभाजन की मांग ठुकरा दी...

  • उद्धव ने राज ठाकरे को संजीवनी दे दी

    जिस तरह से 2015 में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद, उनकी पार्टी और परिवार को संजीवनी दी थी उसी तरह महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे को दी है। हो सकता है कि इसका कुछ फायदा उद्धव ठाकरे को भी हो लेकिन राजनीति के हाशिए से भी धकेल कर बाहर कर दिए गए राज ठाकरे का पुनर्जीवन हो गया। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के लोगों ने राज ठाकरे की विभाजनकारी राजनीति को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। गैर मराठी लोगों पर हमले या हिंदुत्व की राजनीति का उनका प्रयास पूरी तरह से नाकाम रहा...

  • हिंदी का विरोध अब व्यर्थ है

    कंधार से लेकर कन्याकुमारी और कच्छ से लेकर कामरूप तक— अधिकांश स्थानों पर हिंदी किसी न किसी रूप में विद्यमान है और संपर्क भाषा का काम करती है। इसका बहुत बड़ा श्रेय हिंदी फिल्मों को जाता है, जिसका केंद्र महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई है। हिंदी सहित सभी भाषाएं समाज को जोड़ती है। परंतु कुछ स्वार्थी, संकीर्ण और औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त राजनीतिज्ञ— भाषा का उपयोग समाज को बांटने और घृणा फैलाने के लिए करते है। यह एक विचित्र पहेली है कि हिंदी पढ़ने से स्वयं की पहचान खतरे में पड़ जाती है, लेकिन अंग्रेजी का अध्ययन करते समय ऐसी कोई...

  • 20 साल बाद एक मंच पर उद्धव और राज ठाकरे

    मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को कई सालों के बाद एकसाथ मंच साझा किया। इस रैली को लेकर शिवसेना (यूबीटी) की पूर्व मेयर और प्रवक्ता किशोरी पेडनेकर का बयान आया। उन्होंने इसे खुशी का दिन बताया।  शिवसेना (यूबीटी) की प्रवक्ता किशोरी पेडनेकर ने बात करते हुए कहा हमें बहुत खुशी और आनंद महसूस हो रहा है। आज मनसे और शिवसैनिकों का मिलन हो रहा है और ये हमारे लिए खुशी का दिन है। जब हम दोनों अलग थे तो हम अपने मुद्दों और विजन के अनुसार अपना कार्य कर...

  • सियासत के चक्रव्यूह में

    महाराष्ट्र का घटनाक्रम मिसाल है कि पहचान की सियासत कैसे वहां भी विवाद खड़े कर देती है, जहां इसकी जड़ें मौजूद नहीं होतीं। ऐसे विवाद आज भारत में आम जन को आपस में जोड़ने वाले हर पहलू की बलि ले रहे हैं।    महाराष्ट्र में हिंदी सियासत के चक्रव्यूह में फंस गई है। जोड़ने वाली ये भाषा वहां एक विभाजन रेखा बन गई है। वहां के सियासी समूहों में सबकी रुचि माहौल को अधिक से अधिक गरमाए रखने में है, वरना मेल-मिलाप से मसले को हल कर लेना कठिन नहीं होता। महाराष्ट्र में कभी हिंदी विरोध मजबूत मुद्दा नहीं रहा। विडंबना...

  • उद्धव और राज ठाकरे साझा रैली करेंगे

    मुंबई। महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे नजदीक आ गए हैं और भाषा के सवाल पर साझा रैली करने जा रहे हैं। पहली कक्षा से ही हिंदी भाषा को स्कूलों में शामिल करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे पांच  जुलाई को मुंबई में साझा रैली करेंगे। इससे पहले उद्धव ने छह जुलाई को और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सात जुलाई को रैली निकालने का ऐलान किया था। एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने इस मुद्दे पर उद्धव व राज ठाकरे को समर्थन दिया है। पवार ने कहा,...

  • उद्धव को तालमेल से रोकने की कोशिश

    महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो रहा है। यह साफ दिख रहा है कि उद्धव ठाकरे अपने चचेरे भाई राज ठाकरे से तालमेल करना चाहते हैं। तालमेल की शर्तें क्या होंगी इस पर चर्चा चल रही है। हालांकि ऐसा नहीं है कि राज ठाकरे की पार्टी बहुत बड़ी या लोकप्रिय है। संसद या विधानमंडल या महानगरपालिका कहीं भी उनका एक भी सदस्य नहीं है। फिर भी उद्धव को लग रहा है कि ठाकरे परिवार के एक होने से मुंबई की जनता में एक मैसेज जाएगा और परिवार वापस मुंबई...

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