राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

संसद में फिर विपक्षी पार्टियां कांग्रेस के साथ

कांग्रेस पार्टी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने के लिए बुलाया तो लगभग सारी विपक्षी पार्टियां नदारद रहीं। यूपीए में शामिल पार्टियों के नेता भी कांग्रेस की यात्रा के समापन कार्यक्रम में शामिल होने श्रीनगर नहीं गए। लेकिन संसद का सत्र शुरू होते ही सारी विपक्षी पार्टियां कांग्रेस के साथ जुड़ गई हैं। इससे पहले भी ऐसा ही हुआ था। विपक्ष के नेता यात्रा में शामिल नहीं हो रहे थे लेकिन दिसंबर में हुए शीतकालीन सत्र में कांग्रेस के साथ थे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सत्र के दौरान दो बार बैठक की थी और दोनों बार लगभग सारी विपक्षी पार्टियां उसमें शामिल हुई थीं। यहां तक कि कांग्रेस का विरोध कर रही आम आदमी पार्टी और भारत राष्ट्र समिति ने भी उसमें हिस्सा लिया था।

सत्र खत्म होते ही विपक्ष की एकता भी खत्म हो गई और कई विपक्षी पार्टियां भाजपा की तरह  ही कांग्रेस से भी दूरी दिखाने लगीं। अब फिर बजट सत्र में आम आदमी पार्टी और बीआरएस से लेकर सारी विपक्षी पार्टियां कांग्रेस के साथ हैं। राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार और शुक्रवार को बैठक बुलाई तो सारी पार्टियां शामिल हुईं। तृणमूल कांग्रेस और बीआरएस व आप के नेता बैठक में गए और साझा रणनीति बना कर काम किया। असल में संसद में विपक्षी पार्टियों को कांग्रेस की जरूरत है क्योंकि वहां कांग्रेस अब भी मजबूत है। उसके बगैर सरकार को प्रभावी तरीके से घेरना संभव नहीं है। इसलिए विपक्षी पार्टियां वहां कांग्रेस से हाथ मिला लेती हैं। संसद के बाहर कांग्रेस की ताकत कम है और विपक्षी पार्टियां अपने अपने राज्य में कांग्रेस से ज्यादा मजबूत ताकत हैं। इसलिए वे संसद से बाहर की राजनीति में कांग्रेस से दूरी बना कर रखते हैं। उनको लगता है कि बाहर कांग्रेस से हाथ मिला कर रखने से कांग्रेस मजबूत होगी और उसके नेतृत्व को वैधता मिलेगी।

By NI Political Desk

Get insights from the Nayaindia Political Desk, offering in-depth analysis, updates, and breaking news on Indian politics. From government policies to election coverage, we keep you informed on key political developments shaping the nation.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

three × four =