Poverty

आर्थिकी भी खलास!

हिसाब से आर्थिकी की बरबादी को नंबर एक पर मानना चाहिए। पर मैं अशिक्षा, अज्ञानता को इसलिए अधिक घातक-गंभीर समझता हू क्योंकि यदि भारत (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, हम-आप से लेकर आम नागरिक सभी) अशिक्षा-अज्ञान के वायरस में जकड़ गए...

भारत का सिकुड़ता मध्यम वर्ग

कोरोना की महामारी के दूसरे हमले का असर इंतना तेज है कि लाखों मजदूर अपने गांवों की तरफ दुबारा भागने को मजबूर हो रहे हैं। खाने-पीने के सामान और दवा-विक्रेताओं के अलावा सभी व्यापारी भी परेशान हैं। उनके काम-धंधे...

अर्थव्यवस्था लौट रही है पटरी पर!

कोरोनाकाल में भारत की अर्थव्यवस्था किस प्रकार मजबूत होकर उभर रही है, इसका खुलासा संस्था- "वैश्विक आर्थिक सहयोग और विकास संगठन" (ओ.ई.सी.डी.) की रिपोर्ट ने भी किया है।

खतरे में खाद्य सुरक्षा

भारत में खाद्य पदार्थों की बढ़ी महंगाई पर पिछले हफ्ते रिजर्व बैंक ने भी चिंता जताई। यह आम तजुर्बा है कि अनाज से लेकर सब्जी-फलों तक के दाम पिछले दो महीनों में तेजी से बढ़े हैं

पांडुरंग शास्त्री जैसा कोई और नहीं

आज पांडुरंग शास्त्री आठवलेजी का 100 वां जन्मदिन है। मैं उनकी तुलना किससे करुं ? पिछले 100 वर्षों में ऐसे कई महापुरुष हुए हैं, जिनके नाम विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हुए हैं लेकिन अकेले आठवलेजी ने वह चमत्कारी काम कर दिखाया है, जो बस उन्होंने ही किया है, किसी और ने नहीं। महाराष्ट्र और गुजरात में खास तौर से और भारत तथा अन्य लगभग 30 देशों में उनके 50 लाख से भी ज्यादा अनुयायी रहे हैं।

भूख में भारत 94वें स्थान पर

भारत में विकास के तमाम बड़े बड़े दावों के बीच हकीकत यह है कि देश भूख के सूचकांक में 94वें स्थान पर है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने शुक्रवार को यह रिपोर्ट जारी की। दुनिया के 107 देशों की इस सूची में भूख और कुपोषण के मामले में भारत गंभीर श्रेणी में 94वें स्थान पर है।

बेनकाब हो रहे हैं गरीबों की लाश पर राजनीति करने वाले : योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गरीबी और गरीबों की लाश पर राजनीति करने वाले कभी गरीबों के हितैषी नहीं हो सकते। ऐसे लोग बेनकाब हो रहे हैं।

गरीबों के लिए सचमुच क्या काम हुआ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के रेहड़ी-पटरी वालों से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बात की। इसको स्वनिधि संवाद का नाम दिया गया है। नाम से ही जाहिर है कि यह स्वरोजगार से जुड़ा हुआ मामला है।

बुंदेलखंड: गांव और खेत में पानी रोकने की जुगत

देश और दुनिया में बुंदेलखंड की पहचान सूखा, गरीबी, पलायन और बेरोजगारी के कारण है, मगर अब यहां के लोग हालात बदलना चाहते हैं। इसके लिए सबसे

कोरोना रिटर्न्स, सरकार और कांग्रेस बैकफुट पर

अप्राकृतिक संकट कोरोना के कारण जहां एक ओर मध्यप्रदेश की जनता गरीबी,भुखमरी,बेरोजगारी और जीवन यापन की जद्दोजहद से जूझ रही है तो वहीं सियासतदार इनकी इस बेबसी,लाचारी पर अपनी रोटियां
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