राहुल-अखिलेश के अश्वमेध का नज़रबट्टू
नरेंद्र भाई मोदी की लोकप्रियता इस समय अपने निम्नतम स्तर पर है। भाजपा के लिए समर्थन तो और भी बहुत नीचे चला गया है। लेकिन इस के बावजूद योगी आदित्यनाथ को हराना अगर ख़ाला जी का खेल नहीं है। सपा और कांग्रेस अगर अलग-अलग लड़े तो तय मानिए कि योगी सवा दो सौ सीटों का आंकड़ा छुएंगे। अगर उन्हें 160 के आसपास रोकना है तो सपा-कांग्रेस की एकजुटता ज़रूरी है। मैं इसे अखिलेश यादव के सियासी सोच का छोटापन मानता हूं कि उन्होंने गोरखपुर या बनारस के बजाय रायबरेली से अपनी यात्रा शुरू करना बेहतर समझा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा...