राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

डगमगाते हुए पाये

भारत

दो दशकों तक भारत में खपत का प्रमुख इंजन बढ़ता हुआ मध्य वर्ग था, जिसका उपभोग क्रमिक रूप से बढ़ रहा था। लेकिन अब उभरा नया ढांचा मोटे तौर पर प्रीमियम उपभोग पर केंद्रित हो गया है।

भारत के सकल घरेलू उत्पाद में उपभोग का योगदान 60 प्रतिशत है। इन्वेस्टमेंट एवं असेट मैनेजमेंट कंपनी मार्सेलस के एक ताजा विश्लेषण के मुताबिक यह उपभोग तीन स्तंभों पर टिका है, जिनमें दो डगमगा रहे हैं। कंपनी से जुड़े विशेषज्ञों के इस आकलन के मुताबिक गुजरे दो दशकों में भारत की खपत का प्रमुख इंजन बढ़ता हुआ मध्य वर्ग था, जिसका उपभोग क्रमिक रूप से बढ़ रहा था। लेकिन अब उभरा नया ढांचा मोटे तौर पर प्रीमियम उपभोग पर केंद्रित हो गया है। भारत का उपभोग आधार व्यापक होने के बजाय ‘K’ आकार में विकसित हो रहा है- जहां ऊपरी 10 फीसदी आबादी (लगभग 10-15 करोड़ लोग) तो प्रीमियम वस्तुओं पर खूब खर्च कर रही है, लेकिन विशाल मध्य एवं निम्न वर्गीय आबादी की वास्तविक आय और क्रय शक्ति ठहरी हुई है।

मार्सेलस का कहना है कि केवल शीर्ष वर्ग के बल पर दीर्घकालिक उपभोग चक्र का टिकना संदिग्ध है। मध्य वर्ग का उपभोग ऋण आधारित हो गया है। ऋण का रूप भी बदला है। पहले क्रेडिट कार्ड या बैंक लोन का हिस्सा में इसमें ज्यादा होता था, लेकिन अब सोना या अन्य वस्तुओं को गिरवी रख कर लिए गए या माइक्रो-फाइनेंस कंपनियों से लिए गए महंगे कर्ज का अनुपात काफी बढ़ गया है। इन कर्जों में डिफॉल्ट की संख्या बढ़ी है। निम्न वर्ग का उपभोग तो लगातार सरकारों से होने वाले कैश ट्रांसफर पर निर्भर होता जा रहा है।

मार्सेलस के मुताबिक इसी सूरत का नतीजा है कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजें बनाने वाली (एफएमसीजी) कंपनियों की बिक्री में वृद्धि दर 2010-11 के 11-12 फीसदी से गिर कर 2025-26 में तीन प्रतिशत रह गई। ह्वाइट कॉलर नौकरियों की संख्या में वृद्धि भी कमजोर हुई है, जबकि मध्यम एवं निम्न स्तर पर वास्तविक मजदूरी लंबे समय से स्थिर है, या उसमें गिरावट आई है। ऐसा आमदनी की तुलना में जीवन-यापन की लागत में तेज बढ़ोतरी के कारण हुआ है। ये स्थिति क्यों बनी, मार्सेलस उन वजहों की तलाश में नहीं गई है। उसका मकसद निवेशकों को सचेत करना भर है। बहरहाल, जिन नीतिगत कारणों से ऐसा हुआ है, वे जग-जाहिर हैं।

By NI Editorial

The Nayaindia editorial desk offers a platform for thought-provoking opinions, featuring news and articles rooted in the unique perspectives of its authors.

Leave a comment