हैकर कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का अति संवेदनशील डेटा चुराने में सफल हो गए। संयंत्र में कंट्रोल, कूलिंग, और वेंटिलेशन के इंजीनियरिंग ब्लू प्रिंट; तथा विक्रेताओं/ आपूर्तिकर्ताओं की सूची को डार्क वेब पर डाल दिया गया है।
डेटा चोरी की ताजा घटना ने भारत की साइबर सुरक्षा से संबंधित कमजोरियों को फिर उजागर किया है। न्यूक्लीयर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का दावा है कि लीक डेटा परमाणु सुरक्षा प्रणाली से संबंधित नहीं है। बहरहाल, इसे मान भी लिया जाए, तब भी इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि हैकर भारतीय परमाणु कार्यक्रम से संबंधित अति संवेदनशील डेटा चुराने में सफल हो गए। कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में कंट्रोल, कूलिंग, और वेंटिलेशन के इंजीनियरिंग ब्लू प्रिंट; तथा विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं की सूची को ‘वर्ल्ड लीक्स’ नामक रैनसमवेयर ने चुरा लिया। इस डेटा के संचालन का ठेका 2018 में अनिल अंबानी की कंपनी को दिया गया था। इसके पहले ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी से डेटा चुराकर उसे डार्क वेब पर डाल दिया था।
बताया जाता है कि दोनों घटनाओं को मिलाकर लगभग 10 लाख से अधिक संवेदनशील फाइलें लीक हुई हैं। स्पष्टतः यह केवल दो निजी कंपनियों की सुरक्षा में चूक का मामला नहीं है। बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, भू-राजनीतिक साख, और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग महाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा पर सीधा प्रहार है। कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की मुख्य रिएक्टर प्रणाली भले सुरक्षित हो, लेकिन थर्ड पार्टी के सर्वर से संयंत्र की आंतरिक संवेदनशील संरचना का डार्क वेब पर पहुंच जाना दर्शाता है कि हमारी रणनीतिक सुरक्षा की कड़ियां कितनी कमजोर हैं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स संबंधित घटना भारतीय कॉरपोरेट जगत की आर्थिक और तकनीकी साख से संबंधित है।
ये कंपनी एप्पल, टेस्ला, और क्वालकॉम जैसी वैश्विक कंपनियों के व्यावसायिक डेटा को संभालती है। इनका 630 जीबी डेटा डार्क वेब के जरिए अब उनकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों को उपलब्ध है। जाहिर है, इससे भारत की विश्वसनीयता को गहरा धक्का लगा है। भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का खास डेटा अगर सुरक्षित नहीं है, तो विदेशी निवेश लाने और तकनीकी हस्तांतरण की भारत की कोशिशों का सफल होना संदिग्ध बना रहेगा। इन घटनाओं ने साइबर कानूनों का सख्त अनुपालन कराने की भारत की क्षमता को कठघरे में ला खड़ा किया है। अतः सरकार और उद्योग जगत को इसे महज ‘डेटा ब्रीच’ मानना बंद करना चाहिए। साइबर सुरक्षा के लिए अब युद्धस्तरीय तैयारी की आवश्यकता है।
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