कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की ओर से पार्टी धन के इस्तेमाल के लिए दायर की गयी तत्काल सुनवाई की अर्ज़ी को ठुकरा दिया है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने तुरंत सुनवाई की पार्टी की अर्ज़ी को ठुकराते हुए कहा कि पूजा की छुट्टियों के बाद सामान्य प्रक्रिया के तहत इस मामले पर सुनवाई होगी।
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक अवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार की अध्यक्षता वाली एक समिति ने त्योहार से पहले ज़रूरी खर्चों के लिए धन जारी करने से मना कर दिया है। विशेष अधिकारी ने इस बारे में लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा है कि क्या चुनाव आयोग का वह आदेश, जिसमें पार्टी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगायी गयी थी, सिर्फ़ उपचुनावों के लिए है या अनिश्चितकाल तक लागू रहेगा।
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गौरतलब है कि यह विवाद एक निजी बैंक में टीएमसी के तीन खातों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं पर पुलिस की कार्रवाई के बाद शुरू हुआ। खातों के बंद होने के बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। अदालत ने हालांकि गत नौ जुलाई को निर्देश दिया था कि सुश्री ममता बनर्जी का तृणमूल कांग्रेस का अगले साल 29 जनवरी तक खातों पर पूरा नियंत्रण नहीं होगा लेकिन रोज़मर्रा की संगठनात्मक गतिविधियों और कर्मचारियों के वेतन के लिए ज़रूरी धन विशेष अधिकारी के ज़रिए जारी किए जाने चाहिए।
एक नयी कानूनी मुश्किल तब खड़ी हुई जब चुनाव आयोग ने सुश्री ममता बनर्जी और श्री रिताब्रत बनर्जी गुटों को ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से अस्थायी रूप से रोक दिया। राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल राजदीप मजूमदार ने तर्क दिया कि चूंकि चुनाव आयोग ने उस नाम से पार्टी के कानूनी अस्तित्व को निलंबित कर दिया था, इसलिए उस नाम से दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी।
Pic Credit : UNI
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