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चीन-पाक का पांच सूत्री प्रस्ताव

नई दिल्ली। ईरान भले अपने देश में चल रही जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं कर रहा है लेकिन पाकिस्तान भी पीछे नहीं हट रहा है। मिस्र, सऊदी अरब और तुर्किए के विदेश मंत्रियों के साथ इस्लामाबाद में बैठक करने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार बीजिंग पहुंचे। वहां उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बाद में दोनों देशों ने ईरान में जंग की समाप्ति और पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए एक पांच सूत्री प्रस्ताव पेश किया।

चीन और पाकिस्तान की ओर से जारी पांच बिंदुओं वाली योजना में तत्काल युद्ध रोकने और शांति बहाल करने की बात कही गई है। इस पांच सूत्री प्रस्ताव में पहला बिंदु यह है कि लड़ाई तुरंत रोकी जाए और युद्ध को आगे न बढ़ाया जाए। दूसरा प्रस्ताव है, जल्दी से जल्दी शांतिवार्ता शुरू हो और सभी देशों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए। तीसरा, आम लोगों और सिविल इलाकों पर हमले बंद हों। चौथा, होरमुज की खाड़ी के समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जाए और पांचवां, संयुक्त राष्ट्र संघ के नियमों के मुताबिक शांति समझौता हो।

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका की ओर से एक 15 सूत्री प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसे पाकिस्तान के जरिए ईरान को भेजा गया। बाद में ईरान ने अपना एक पांच सूत्री प्रस्ताव पेश किया। हालांकि दोनों में से किसी पर कोई बात आगे नहीं बढ़ी। बहरहाल, एक तरफ चीन शांति बहाली की बात कर रहा है तो दूसरी ओर अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को कहा कि रूस और चीन जरूरत पड़ने पर ईरान की मदद कर रहे हैं और अमेरिका उनका सामना कर रहा है।

पीट हेगसेथ ने कहा, ‘हमें पता है कि रूस और चीन क्या कर रहे हैं। जहां जरूरत होती है, हम उसे रोकते हैं, कम करते हैं या सीधे मुकाबला करते हैं’। इसके आगे हेगसेथ ने कहा ईरान जंग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों पर खत्म होगी। अमेरिका इसी दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि होरमुज जैसे समुद्री रास्ते की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ अमेरिका की नहीं है, बल्कि दूसरे देशों को भी इसमें साथ देना चाहिए।

उधर कतर ने स्पष्ट किया है कि ईरान जंग को लेकर अभी चल रही किसी भी मध्यस्थता की कोशिश में वह शामिल नहीं है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान अपने देश की सुरक्षा पर है। दूसरी ओर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल, ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच सामान्य रिश्ते  नहीं चाहते हैं।

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By NI Desk

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