नई दिल्ली। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर के बाद अब बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद भी अदालत में पहुंची है। राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने चुनाव आयोग के अभियान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उधर राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने इस मामले को लेकर नौ जुलाई को पूरे बिहार में चक्का जाम का ऐलान भी किया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता पुनरीक्षण का काम पारदर्शिता के लिए जरूरी है और 22 साल के बाद इसे किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि इतने कम समय में इसे क्यों किया जा रहा है। इसे लेकर राजद सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और चुनाव आयोग के फैसले पर रोक लगाने की अपील की है। इससे पहले एडीआर और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा भी चुनाव आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दे चुके है। इन याचिकाओं मे कहा गया है चुनाव आयोग का यह फैसला मनमाना है और इसके चलते बिहार के लाखों मतदाताओं का मतदान का अधिकार छीन जाएगा।