nayaindia mp vidhan sabha session सद्भाव से सत्र की शुरुआत
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सद्भाव से सत्र की शुरुआत

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भोपाल। प्रोटेम स्पीकर सहित 208 विधायकों की शपथ हो चुकी है। सत्र के पहले दिन सदन के अंदर सत्ता पक्ष में सद्भाव देखने को मिला। विधायक नरेंद्र सिंह तोमर के विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए दोनों ओर से नामांकन दाखिल में साथ रहा। उनका निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। आज शेष बचे विधायकों की शपथ हो जाएगी। दरअसल, जब-जब किसी एक दल को सदन के अंदर भारी बहुमत मिलता है तब स्वाभाविक रूप से सामंजस्य दिखाई देने लगता है। सोमवार को मध्यप्रदेश की विधानसभा के अंदर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सद्भाव देखने को मिला। भाजपा के 163 विधायक चुनाव जीतकर सदन में आए हैं। वहीं कांग्रेस के 66 विधायक ही सदन में आ सके हैं। हालांकि कांग्रेस ने सत्र शुरू होने के एक दिन पहले ही अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व को कमान सौंपी है लेकिन जिस तरह से भाजपा के पास एक तरह से हैवी वेट नेतृत्व सदन में मौजूद है उससे कांग्रेस के युवा नेतृत्व को सरकार को घेरना आसान नहीं होगा। 2018 में जब कांग्रेस सरकार में आई थी तब भाजपा और कांग्रेस में विधायकों की संख्या में मामूली अंतर था। इस कारण अध्यक्ष पद के लिए उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन हुआ लेकिन इस बार भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और विधायक नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष के लिए घोषित किया था वे जब नामांकन दाखिल करने गए तो सत्ता और विपक्ष दोनों उनके साथ थे। अब उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है।

बहरहाल, सत्र के पहले दिन ही सदन का माहौल गरिमामय नजर आया। सभी एक – दूसरे को बधाई देते हुए दिखाई दिए। सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले प्रोटेम स्पीकर गोपाल भार्गव के कक्ष में पहुंचकर दोनों ही दलों के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे सौजन्य मुलाकात कर पुष्पगुच्छ भेटकर अभिवादन किया। जिनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं विधायक नरेंद्र सिंह तोमर, प्रहलाद पटेल, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे सहित दोनों ही दलों के विधायक विशेष रूप से शामिल थे। उसके बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई और शाम 5:00 बजे तक 207 विधायक शपथ ले चुके थे। 12 विधायकों ने संस्कृत में एक ने उर्दू और एक ने अंग्रेजी में शपथ ली। सबसे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव उसके बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने शपथ ली। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि विधानसभा के सत्र का पहला दिन है मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आज सत्ता पक्ष और विपक्ष ने मिलकर नए विधानसभा अध्यक्ष का नामांकन दाखिल किया है। मैं विधायक दल के नेता के नाते विपक्ष की सकारात्मक सोच का स्वागत करता हूं। विपक्ष इसी तरह अपना रचनात्मक सहयोग दें। हम प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधानसभा में पुराने और अनुभवी साथी भी चुनकर आए हैं। नई पीढ़ी का भी पर्याप्त समावेश दिख रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भी विधानसभा परिसर में बने नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में पहुंचकर पूजा-अर्चना करके अपना कार्य भार ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने अपनी बुआ एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय जमुना देवी की तस्वीर पर माल्यार्पण किया।

कुल मिलाकर 2023 की विधानसभा बहुत कुछ बदली हुई नजर आई। सदन के अंदर जहां वरिष्ठ नेता चुनाव हार जाने के कारण दिखाई नहीं दे रहे थे, वहीं नए सदस्यों को जिम्मेवारी मिलने से नजारा बदला -बदला नजर आ रहा था। नरेंद्र तोमर और कैलाश विजयवर्गीय लंबे अंतराल के बाद विधानसभा लौटे हैं। वहीं प्रहलाद पटेल पहली बार विधानसभा में आए हैं। वहीं दूसरी ओर लगातार सात चुनाव जीत चुके डॉक्टर गोविंद सिंह चुनाव हारने के कारण सदन में दिखाई नहीं दिए तो संसदीय कार्य मंत्री का लंबे अरसे दायित्व निभा रहे पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा भी चुनाव हार जाने के कारण सदन में दिखाई नहीं दिए।

जाहिर है या चार दिन का सत्र शपथ का है, अध्यक्ष के निर्वाचन का है। असली तस्वीर तो अगले सत्र से दिखाई देगी जब तक मंत्रिमंडल का गठन भी हो जाएगा और सरकार के कामकाज की समीक्षा का भी अवसर बन जाएगा लेकिन सत्र के पहले दिन जिस तरह का सद्भाव दिखाई दिया उसकी सर्वत्र चर्चा रही। जहां विधानसभा अध्यक्ष का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है वहीं लगातार नौ बार से चुनाव जीत रहे सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य प्रोटेम स्पीकर गोपाल भार्गव के प्रति सदस्यों ने जो सम्मान प्रकट किया इसके पहले ऐसा सदन में कभी दिखाई नहीं दिया।

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