nayaindia Lok Sabha elections 2024 बिहार, झारखंड में कांटे की लड़ाई
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बिहार, झारखंड में कांटे की लड़ाई

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Lok Sabha elections 2024
Lok Sabha elections 2024

भारतीय जनता पार्टी 370 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिन राज्यों में पिछली बार का प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद कर रही है उनमें बिहार और झारखंड दोनों शामिल हैं। बिहार में पिछली बार 40 में से 39 सीटें एनडीए को मिली थी जिसमें भाजपा को अकेले 17 सीटें मिली थीं। इस बार भाजपा को इसमें मुश्किल दिख रही थी तो उसने किसी तरह से राजद और जदयू का गठबंधन तुड़वा कर नीतीश कुमार के साथ तालमेल किया है। इसके बावजूद भाजपा को गारंटी नहीं है कि वह पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएगी। Lok Sabha elections 2024

इसी तरह झारखंड में भाजपा और उसकी सहयोगी को राज्य की 14 में से 12 सीटें मिली थीं। लेकिन उसके तुरंत बाद हुए विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उसे हरा दिया था। तब से भाजपा किसी तरह से सरकार को अस्थिर करने में लगी थी। चुनावी साल में जेएमएम नेता हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी ने विपक्ष का वोट एकजुट किया है। वहां आधा दर्जन सीटों पर भाजपा के लिए मुश्किल लड़ाई दिख रही है। ओवरऑल वोट में भाजपा बहुत आगे है। उसे 56 फीसदी वोट मिले थे, जबकि जेएमएम और कांग्रेस अलायंस को 35 फीसदी वोट मिले थे। यानी 21 फीसदी वोट का अंतर था। Lok Sabha elections 2024

लेकिन सीटवार देखें तो पिछले लोकसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा ने लोहरदगा, खूंटी और दुमका सीट बहुत कम अंतर से जीती थी। खूंटी में अर्जुन मुंडा महज डेढ़ हजार वोट से जीते थे, जबकि लोहरदगा सीट पर सुदर्शन भगत 10 हजार वोट से जीते थे। दुमका में सुनील सोरेन ने शिबू सोरेन को 47 हजार वोट से हराया था। इन तीन सीटों पर कांग्रेस और जेएमएम गठबंधन कम अंतर से हारा था और दो सीटों- चाईबासा व राजमहल में जीत मिली थी। सो, कम से कम पांच लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां विपक्ष गठबंधन मजबूत है। पिछली बार के मुकाबले विपक्ष का गठबंधन इस बार बेहतर स्थिति में इसलिए भी है क्योंकि पांच साल राज्य में भाजपा के तमाम प्रयासों के बावजूद न जेएमएम में कोई टूट हुई और न कांग्रेस टूटी। हेमंत सोरेन के इस्तीफा देने और गिरफ्तारी के बाद भी चम्पई सोरेन के साथ सभी विधायक एकजुट रहे। Lok Sabha elections 2024

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बिहार में भाजपा को पता था कि राजद, जदयू, कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन ज्यादा मजबूत है इसलिए नीतीश कुमार को उसने अपने साथ मिलाया। ओवरऑल वोट में भाजपा, जदयू और लोजपा गठबंधन को 23 फीसदी वोट की बढ़त थी। एनडीए को 53 फीसदी तो कांग्रेस और राजद गठबंधन को 30 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन सीटवार मुकाबले में कई सीटें बहुत कांटे की टक्कर वाली थीं। मिसाल के तौर पर जहानाबाद सीट पर राजद के सुरेंद्र यादव सिर्फ साढ़े 17 सौ वोट से हारे थे।

पाटलिपुत्र सीट पर मीसा भारती 39 हजार वोट हारी थीं तो कटिहार सीट पर कांग्रेस के तारिक अनवर 57 हजार वोट से हारे थे। राजद और कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां काराकाट और औरंगाबाद सीट पर भी एक लाख से कम वोट से हारी थीं। विपक्षी गठबंधन सिर्फ एक किशनगंज सीट जीत पाया था। लेकिन इस बार नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद विपक्ष ज्यादा आक्रामक लड़ाई की तैयारी में है, जिसमें पाटलिपुत्र, जहानाबाद, कटिहार, सासाराम, औरंगाबाद, काराकाट, सीवान, सारण और बक्सर जैसी करीब 10 सीटों पर कांटे की टक्कर होगी। इसलिए भाजपा नीतीश कुमार के अलावा लोजपा के दोनों खेमों यानी चिराग पासवान व पशुपति पारस के साथ साथ उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी को भी एनडीए में रखे हुए है। इन सबको सीटें देकर वोट एकजुट करने की कोशिश में है तो बूझ सकते है बिहार में मुकाबला कितना तगड़ा   है।  Lok Sabha elections 2024

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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