अमेरिका आज मजाक है! राष्ट्रपति ट्रंप लंगूर के हाथ में उस्तरे जैसी लोकोक्तियों के पर्याय हैं! अमेरिकी इतिहास में पहली बार है कि ‘ग्रेट अमेरिका’ अकेला, अलग-थलग है! जबकि ट्रंप का दो टूक ऐलान है कि अमेरिका जीता! ईरान खत्म! ईरान की सेना, नौसेना, वायुसेना, लीडरशिप सब खत्म। वही दुनिया का आंखों देखा सत्य क्या है? ईरान ढीठ है, साबुत है। होर्मुज़ को खतरे की खाड़ी बना कर तेल-गैस जहाजों की आवाजाही को रोका है। विश्व अर्थिकी हिली हुई है। खाड़ी के उन अरब देशों में त्राहिमाम है, जिन्होंने अमेरिकी सैनिक छतरी के नीचे पेट्रोडॉलर की चकाचौंध का वैश्विक घमंड बनाया हुआ था। हर कोई अमेरिका से तौबा कर रहा है। अमेरिकी ढाल से ईरानी मिसाइल, ड्रोन रुके नहीं।
मगर ट्रंप का सत्य से क्या लेना! न चुप रहेंगे और न सच्चाई मानेंगे। वे विजय की वैसी ही डुगडुगी बजाए हुए हैं जैसे पिछले साल मई में भारत में प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर का नगाड़ा बजाया था। मतलब भारत ने पाकिस्तान को ठोंक डाला! भारत जीता! दुनिया ने भारत का लोहा माना!
तुलना करें ट्रंप के ईरान को मजा चखाने के हवाई ऑपरेशन और मई 2025 के मोदी के ऑपरेशन सिंदूर के समय को! आकार, अवधि का फर्क है अन्यथा सवाल है जैसे अमेरिका ने क्या पाया तो भारत ने क्या पाया? क्या ऑपरेशन सिंदूर से आतंक पोषक पाकिस्तान पस्त हुआ? आतंक के असल सूत्रधार आईएसआई का मुख्यालय क्या तबाह हुआ? पहलगाम की आतंकी घटना से ठीक पहले कश्मीर का राग आलापने वाले जनरल मुनीर की लीडरशिप क्या ध्वस्त हुई? क्या पाकिस्तान हारा, पीटा, ध्वस्त और वैश्विक अछूत बना?
उलटे पूरी दुनिया में अलग नैरेटिव था। भारत की साख, उसकी सैन्य ताकत पर सवाल उठे! मगर भारत और अमेरिका का एक बेसिक फर्क है। अमेरिका में भक्तों की ताकत के बावजूद ट्रंप लगभग अकेले, बेसुरे हैं। उनका उप राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, कैबिनेट से लेकर रिपब्लिकन पार्टी के नेता, सांसद, मीडिया, फॉक्स न्यूज़ जैसे भक्त चैनल भी ट्रंप के सुर में सुर नहीं मिला रहे। गुरुवार रात-सुबह ट्रंप ने मजाक में कहा जेडी वेंस (उप राष्ट्रपति) अलग राय रखता है तो मैंने उसे कहा जाओ, करो बात। वह सफल होगा तो उसे क्रेडिट दूंगा, नहीं तो मैं क्रेडिट लूंगा!
यह है बुद्धि, सामूहिक, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की तासीर के अमेरिका बनाम भक्ति-लाठी की हवाबाजी के भारत का फर्क।
सो, पैंसठ प्रतिशत अमेरिकियों ने ट्रंप के झूठ को खारिज किया हुआ है। हालांकि ट्रंप का विरोधियों के प्रति वही रुख है जो नरेंद्र मोदी का था। ट्रंप का भी रुख है, देखो मैं शूरवीर (छप्पन इंची छाती वाला), मैंने वह कर दिखाया, जिसकी 47 वर्षों में किसी की हिम्मत नहीं हुई। मैं हाथी (रिपब्लिकन पार्टी का प्रतीक) महान और देखो ये गधड़े (डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रतीक) कह रहे हैं मैं झूठा!
मगर अमेरिकी बहुसंख्या में ट्रंप को गधेड़ा करार दे रहे हैं! वही भारत में नरेंद्र मोदी के झूठ के नगाड़ों पर क्या था? मुर्दा कौम के लाठीधारी लोगों का मोदीजी की शान में यह पथसंचलन था कि जय मोदी हरे! मैं सेवक तुम स्वामी। तुम बिन और न दूजा। हम बढ़ जा रहे हैं विजयपथ की ओर!
यही हम हिंदुओं का इतिहास है, नियति है। समय राजे-रजवाड़ों का हो या इक्कीसवीं सदी के पृथ्वीराज चौहान उर्फ नरेंद्र मोदी का। शस्त्रागार में सब है। भाला, तलवार, बंदूक, तोप, लड़ाकू जहाज, हवाई जहाज, परमाणु बम सब सजे हुए हैं। दशहरे के दिन उनकी पूजा भी होगी। लेकिन खैबर पार से पांच सौ घुड़सवार जब भी सोमनाथ मंदिर या दिल्ली के मुहाने पहुंचे तो हथियार धरे रह गए। बावजूद इसके राजा के शौर्य की कीर्ति चारणों की ऐसे ही स्तुति-गान (पृथ्वीराज रासो) से था कि हर, हर मोदी, घर-घर मोदी! झूठ, भक्ति अंतहीन है। खाड़ी के विकट संकट में भी झूठ कि हमारे यहां तो सब ठीक। मैंने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ने दिए। सो, हिंदुओं जागो, मुसलमान को हराओ, बंगाल जिताओ!


