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यूएई ने भी भारत की जुंबा नहीं बोली

ऑपरेशन सिंदूर

इसी तरह शिव सेना नेता श्रीकांत शिंदे की अध्यक्षता में संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर गया डेलिगेशन वहां के सहिष्णुता मंत्री यानी टॉलरेंस मिनिस्टर से मिला। भारत के डेलिगेशन से मिलने के लिए टॉलरेंस मिनिस्टर को अधिकृत करना ही अपने आप में बहुत कुछ कहता है। बहरहाल, यूएई के टॉलरेंस मिनिस्टर शेख नाह्यान बिन मुबारक अल नाह्यान ने शिंदे की कमेटी से कहा कि आतंकवाद सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि हम सब लोगों को अंतरराष्ट्रीय समुदा के रूप एक साथ आना चाहिए और मानवता के बेहतर भविष्य की योजना बनानी चाहिए।

अल नाह्यान ने कहा कि उनका देश पहले ही आतंकवाद से लड़ने में भारत के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने भारत को रणनीतिक साझीदार बताया। बाद में शिंदे ने मीटिंग को बहुत फलदायी बताया। लेकिन हकीकत यह है कि यूएई ने वह नहीं कहा, जो भारत सुनना चाहता है। उसने यह नहीं कहा कि भारत ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए जो किया या पहलगाम का बदला लेने के लिए जो कार्रवाई की वह ठीक थी। श्रीकांत शिंदे की अध्यक्षता वाला डेलिगशन यूएई के अलावा लाइबेरिया, कांगो और सिएरा लियोन जाएगा।

भारत के डेलिगेशन की विदेश यात्रा और प्रतिक्रियाएं

एक तीसरा प्रतिनिधिमंडल डीएमके सांसद कनिमोझी के नेतृत्व में रूस गया हुआ है। रूस के अलावा यह डेलिगेशन चार और यूरोपीय देशों स्पेन, लातविया, स्लोवेनिया और ग्रीस जाएगा। इस डेलिगेशन के एक सदस्य नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद मिया अल्ताफ अहमद डेलिगेशन के साथ नहीं गए हैं। वैसे इस कमेटी में दो मुस्लिम थे। एक राजदूत जावेद अशरफ हैं, जो कमेटी के साथ गए हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की कमेटी अमेरिका और साथ साथ पनामा, गुयना, ब्राजील और कोलंबिया जाएगी।

सोचें, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऑपरेशन सिंदूर पर इतना बोल चुके हैं, जितना भारत के नेताओं ने भी नहीं बोला है। ट्रंप के साथ साथ उनके विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मार्को रूबियो को एक एक चीज पता है। सो, शशि थरूर वहां क्या नया बताएंगे? बहरहाल, बैजयंत जय पांडा के नेतृत्व में एक डेलिगेशन सउदी अरब, कुवैत, बहरीन और अलजीरिया के दौरे पर है। रविशंकर प्रसाद का डेलिगेशन ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, डेनमार्क औरर यूरोपीय संघ के दौरे पर गया है। एक डेलिगेशन की नेता सुप्रिया सुले हैं, जिसको मिस्र, कतर, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका का दौरा करना है।

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Pic Credit: ANI

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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