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दुनिया ने ‘तेजस’ जलता देखा!

पर भारत की मानों आंखें बंद। तभी खबर रफा-दफा हुई। जिस सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने तेजस बनाया है, उसने इतना भर कहा, “दुर्घटना विशेष परिस्थितियों की अलग घटना है… तेजस समग्र रूप से विश्वसनीय है”। वही मीडिया चैनलों में सुनाई दिया कि

अमेरिका ने दुबई एयर शो में तेजस दुर्घटना की साज़िश रची। मतलब जो हुआ, दुनिया ने जो देखा और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने लिखा वह सब भारत में बेमतलब। इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने तेजस में बैठकर उसकी विश्वसनीयता बनाई थी।

पर 12 हजार घंटे से अधिक उड़ान के अनुभव वाले एयरफोर्स पायलट विंग कमांडर स्याल के बस में भी यदि तेजस नहीं हुआ तो क्या विश्वसनीयता? ऐसे में क्या पारदर्शी जांच, कमियों पर विचार, सुधार की चिंता की बहस नहीं होनी चाहिए थी? निश्चित ही एयर शो में हादसा नई बात नहीं है। पहले भी रूसी, चीनी विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। लेकिन रूस, चीन ने अपनी गलतियों, कमियों को समझते हुए उत्पाद सुधारे हैं, वही भारतीय कंपनी का सपाट जवाब है कि, हमारा उत्पादन समग्र रूप से विश्वसनीय है, और जो हुआ है वह अपवाद है!

ध्यान रहे तेजस प्रोजेक्ट चालीस साल पुराना है। रूसी मिग 21 की जगह इसके वायु सेना में बेड़े बनने थे। लेकिन हकीकत है कि प्रोजेक्ट कायदे से सिरे ही नहीं चढ़ा। तभी भारतीय वायु सेना में अब सिर्फ 29 स्क्वाड्रन रह गई है, जबकि 42 स्क्वाड्रन की संख्या होनी ही चाहिए। लेकिन विमान हैं ही नहीं। रक्षा मंत्रालय ने तेजस एमके-1ए के 180 विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है। पर विदेशी जीई इंजन की सप्लाई में देरी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के नौकरशाही ढर्रे और तकनीकी बाधाओं का न कांग्रेस सरकारों के समय समाधान निकला और न मोदी सरकार में है। जबकि चीन और पाकिस्तान (चीन की सप्लाई से) के वायु बेड़ों में कमी नहीं है।

दरअसल भारत की सैन्य तैयारियों में न तो समय पर काम होता है और न कोई पारदर्शिता व जवाबदेही है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, डीआरडीओ हो या रक्षा मंत्रालय की खरीद के फैसले, प्रोजेक्ट लटके रहते हैं। दुबई शो में क्रैश के गंभीर मायने इसलिए हैं क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद बने वैश्विक नैरेटिव, डोनाल्ड ट्रंप के विमानों के गिरने वाले बयानों के सिलसिले में तेजस का क्रैश सैन्य साख का भी क्रैश है।

सोचें, तेजस क्रैश के बाद इज़राइली अखबार ने यह बताया है कि तेजस को खरीदने में आर्मेनिया की दिलचस्पी थी पर अब वह खत्म है। उधर वैश्विक सामरिक मीडिया में चीन और पाकिस्तान जेएफ-17 (चीन निर्मित) लड़ाकू विमान के युद्ध में परखे हुए (battle-tested) होने की चर्चा है। दुबई के एयर शो में तेजस का प्रदर्शन खाड़ी के देशों, अफ्रीकी, लातिनी अमेरिकी देशों व मलेशिया आदि को लुभाने या ग्राहक तलाशने के लिए था। पर कोई देश तब खरीदता है जब विक्रेता से सुरक्षा, विश्वसनीयता, आफ्टर सेल सपोर्ट का भरोसा हो और क्रैश इतिहास लगभग शून्य हो। तभी तेजस, यानी भारत के सबसे पुराने स्वदेशी लड़ाकू विमान को लेकर अब दुनिया की राय अहम हो गई है। हिंदुस्तान एयरोस्पेस का पुराना रिकॉर्ड खुलता हुआ होगा। जैसे इक्वाडोर को बेचे गए हेलीकॉप्टर ध्रुव का सौदा। ध्यान रहे, सन् 2008-2009 में हिंदुस्तान एयरोस्पेस ने इक्वाडोर को सात ध्रुव एएलएच बेचे थे। उनमें चार हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुए। इक्वाडोर ने तब कहा था, कि दो दुर्घटनाएं यांत्रिक खराबी से हुई हैं, जबकि हिंदुस्तान एयरोस्पेस का कहना था कि दुर्घटना मानव त्रुटि और खराब रखरखाव के कारण थी। सो, इक्वाडोर ने अनुबंध समाप्त किया और भारत का पहला बड़ा निर्यात कार्यक्रम ठप्प। क्या वही आगे नहीं होगा?

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By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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