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श्रुति व्यास

बाइडन, ट्रंप भाई-भाई!

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Joe Biden and Donald Trump brotherhood: इस हफ्ते की शुरुआत में जो बाइडन ने उम्मीदें जगाईं। या शायद उनका मानना है कि उन्होंने उम्मीदें जगाईं! एनबीसी के “लेट नाईट विथ सेट बेयर्स” कार्यक्रम की रिर्काडिंग के लिए न्यूयार्क (new york) पहुंचे बाइडन ने एक आशाजनक खबर दी। वे बोले, “मुझे उम्मीद है कि अगले सोमवार तक युद्धविराम हो जाएगा”।बेयर्स के साथ साक्षात्कार के दौरान बाइडन ने यह भी कहा कि इजराइल, रमजान के दौरान अस्थाई युद्धविराम लागू करने के लिए राजी हो जाएगा, बशर्ते कुछ बंधकों को रिहा करने पर सहमति हो जाए। Joe biden

पर इसके कुछ ही समय बाद इजराइल और हमास के प्रवक्ताओं ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी कुछ भी तय नहीं है। गाजा में हमास की राजनैतिक शाखा के प्रमुख बेसेम नईम ने कहा कि फिलिस्तीनी इस्लामिक आंदोलन को पिछले हफ्ते पेरिस में अमेरिका, मिस्र और कतर की मध्यस्थता में हुई परोक्ष वार्ताओें के बाद से अभी तक पर युद्धविराम संबंधी कोई नया औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। इस बीच इजरायली अधिकारियों ने रायटर्स को बताया कि बाइडन की टिप्पणी सुनकर उन्हें आश्चर्य हुआ और यह भी कि यह टिप्पणी इजराइल के नेतृत्व के साथ चर्चा के बाद नहीं की गई है। Joe biden

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युद्धविराम की संभाव्यता के संबंध में दोनों पक्षों के इस एहतियात भरे रवैये से उस बात की पुष्टि होती है जो बार-बार कही जा रही है – और वह यह कि अमेरिका मध्यपूर्व के हालात पर अपनी पकड़ खो चुका है। लेकिन यह चुनावी मौसम है जिसमें झूठी उम्मीदें जगाई जाती हैं। और जो बाइडन सबसे पहले एक राजनीतिज्ञ हैं जो चुनाव जीतकर दुबारा राष्ट्रपति बनने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। Joe biden

स्विंग स्टेट मिशिगन  (Swing state Michigan )

मंगलवार को देर रात बाइडन ने मिशिगन के डेमोक्रेटिक (Democratic) प्रायमरीज में जीत हासिल क। मिशिगन एक महत्वपूर्ण स्विंग स्टेट (Swing state Michigan )माना जाता है। पिछले दो चुनावों में यहां जीतने वाला ही राष्ट्रपति बना। मिशिगन की आबादी में अरब मूल की अमेरीकियों का प्रतिशत किसी भी अन्य राज्य  से ज्यादा है और इस समुदाय ने 2020 के चुनाव में बाइडन का जबरदस्त समर्थन किया था।

मगर अभी तो यह राज्य गुस्से से उबल रहा है। वहां कार्यकर्ता कई हफ़्तों से इजरायइल द्वारा गाजा में छेड़े गए युद्ध का बाइडन द्वारा समर्थन किये जाने के प्रति विरोध प्रदर्शित करने के लिए डेमोक्रेट मतदाताओं से ‘अनकमिटेड’ (बिना प्रतिबद्धता के) मतदान करने का आव्हान कर रहे थे। मतदाताओं का वह समूह, जो बिना किसी प्रतिबद्धता के अपना वोट देने की बात कह रहा है, अपने आपको “लिसिन टू मिशिगन” (Listen to Michigan)  कहता है। Joe biden

बाइडन ने अरब-अमेरिकियों के साथ किया विश्वासघात

इसने प्रायमरी में 10,000 ‘अनकमिटिड’ वोटों का लक्ष्य रखा था। मंगलवार की रात तक करीब आधे वोट गिन लिए गए थे। इन 5.80 लाख वोटों में से ‘अनकमिटिड’ को 74,000 वोट मिले अर्थात करीब 13 फीसदी। इससे पता चलता है कि अरब-अमेरिकी एवं राज्य के युवा मतदाताओं में बाइडन के प्रति कितना गुस्सा है।

उन्हें लगता है कि बाइडन ने उनके साथ विश्वासघात किया है।‘लिसिन टू मिशिगन’ (Listen to Michigan) का उद्देश्य है बाइडन (Joe Biden) को यह चेतावनी देना कि वे गाजा (Gaza) में इजराइल (Israel) के सैनिक अभियान को पूर्ण समर्थन न दें। इस अभियान में अभी तक लगभग 30,000 फिलिस्तीनी (philistine) मारे जा चुके हैं।

शायद यही कारण था कि मिशिगन में प्रायमरीज की एक रात पहले बाइडन ने युद्धविराम की उम्मीद जगाई। उन्हें उम्मीद थी कि यह उम्मीद जगाने से उन्हें उतने वोट मिल सकेंगे जितने कि वे उम्मीद कर रहे थे। मगर उनकी उम्मीदें धूल में मिल गईं। Joe biden

डेमोक्रेट पार्टी (Democratic Party ) में जो बाइडन (Joe Biden) का कोई प्रतिद्वंदी नहीं है। ऐसे में मुकाबला जो बाइडन बनाम जो बाइडन बन गया है। एक ओर वह जो बाइडन है जिसने देश की श्रम शक्ति को एक मजबूत बाजार दिया, जिसने बेरोजगारी की दर को घटाया और यह सुनिश्चित किया कि आय के सबसे निचले स्तर पर आय में सबसे ज्यादा दर से बढ़ोत्तरी हो। महंगाई, जो मतदाताओं को लंबे समय से सता रही थी, कम हो रही है और वह भी बिना आर्थिक मंदी के। Joe biden

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दूसरी ओर वह जो बाइडन है जो परले दर्जे का पाखंडी है, जो एक युद्ध पर हमलावर है मगर दूसरे युद्ध का समर्थन करता है।हिसाब से रोनाल्ड रीगन की तरह जो बाइडन को बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) को एक फोन भर करना है और गाजा में नरसंहार रूक जाएगा। अमेरिका के राष्ट्रपति इतना ताकतवर तो अब भी है! मगर बाइडन ने यह कहने के लिए नेतन्याहू को फोन नहीं मिलाया। क्यों? इस विषय पर चर्चा बाद में।

परले दर्जे का पाखंडी जो बाइडन

फिलहाल जो बाइडन और जो बाइडन के बीच कड़ा मुकाबला है। या, जैसा कि मिशिगन डेटलाईन से जारी बीबीसी की एक रपट में कहा गया है, जो बाइडन और “जेनोसाईड जो” एक-दूसरे से कुश्ती लड़ रहे हैं। इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध (Israel Palestine war) ने बाइडन को बहुत अलोकप्रिय बना दिया है। बड़ी संख्या में अमेरिकी उनसे नाखुश हैं, उनसे नफरत करते हैं और उन्हें मैदान से खदेड़ देना चाहते हैं।

बाइडन (Joe Biden) की पीढ़ी जब जवान हो रही थी तब होलोकास्ट (Holocaust) को हुए बहुत समय नहीं बीता था। शायद इस कारण वे यहूदियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं और उन्हें यह विश्वास है कि यहूदीवादी राष्ट्रवाद ही यहूदियों की रक्षा कर सकता है। युवा इस मुद्दे पर बाइडन से अलग मत रखते हैं। परंतु फिर भी बाइडन, बीबी को वह फोन नहीं कर रहे हैं जो गाजा पट्टी में खून-खराबे का अंत कर सकता है।

जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप कुम्भ के मेले में बिछड़े हुए भाई

कुछ रपटों के अनुसार कई अमेरीकियों को जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप कुम्भ के मेले में बिछड़े हुए भाई लगने लगे हैं। कई अमेरीकी मानते हैं कि दोनों अक्षम और अनाड़ी बुजुर्ग हैं जो सत्यानाश करने और युद्ध शुरू करवाने में माहिर हैं। दोनों के बारे में यह कहा जा रहा है कि वे मानवता के भक्षक हैं, किसी की सुनते नहीं हैं और अमेरिका और उसके हितों और पूरी दुनिया के शक्ति-संतुलन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।80 पार के नेताओं के बारे में कुछ लोगों का ख्याल है कि वे लगभग विक्षिप्त हैं और हकीकत से उनका कोई वास्ता नहीं है। पर हकीकत कब बहुत साफ-सुथरी और चमकदार होती है?

जो बाइडन की व्हाईट हाऊस में वापसी की राह जितनी ऊबड़-खाबड़ है, उतने ही कांटे ट्रंप की राह में भी बिछे हुए हैं। पक्का जानिए कि अमेरिका का आने वाला चुनाव देखने लायक होगा। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

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