असम में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से कांग्रेस को झटका दिया जा रहा था। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा को भाजपा ने तोड़ लिया था और नामांकन शुरू होने के बाद उसने कांग्रेस के सांसद प्रद्योत बोरदोलोई को तोड़ लिया। भाजपा ने दोनों को विधानसभा की टिकट भी दी है। लेकिन कांग्रेस ने नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया समाप्त होने के दिन हिमंत बिस्वा सरमा को बड़ा झटका दिया है। कांग्रेस ने उनकी सरकार की एक मंत्री को तोड़ लिया है और अपनी पार्टी की टिकट से मैदान में उतारा है। आदिवासी समाज की नेता का भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल होना भाजपा और निजी तौर पर हिमंता सरमा के लिए बड़ा झटका है।
बताया जा रहा है कि हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे रोकने का बहुत प्रयास किया। उन्होंने अपनी पार्टी की विधायक और राज्य सरकार की मंत्री नंदिता गारलोसा को मनाने की कोशिश की। लेकिन वे कांग्रेस में शामिल हुईं और हाफलॉन्ग सीट से नामांकन दाखिल किया। उनके कांग्रेस में शामिल होने के बाद गौरव गोगोई ने राज्य सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार दीमा हसाओ के हितों से समझौता करती रही है और उसकी दिलचस्पी आदिवासी जमीन कॉरपोरेट को देने में रही है। कांग्रेस ने कहा कि नंदिता दीमा हसाओ के हितों के लिए लड़ती रही हैं। नंदिता गारलोसा के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस के प्रदेश के बड़े नेता निर्मल लंगथासा ने हाफलॉन्ग सीट से अपना नाम वापस ले लिया। भाजपा की ओर से रूपाली लंगथासा को इस सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। इस घटनाक्रम के बाद जनजातीय समूहों में खास कर दीमा हसाओ क्षेत्र में कांग्रेस को फायदे की उम्मीद है।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



