लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा की जो रणनीतिक बैठक हुई है उसमें महाराष्ट्र को लेकर लंबी चर्चा होने की खबर है। उत्तर प्रदेश के बाद भाजपा के लिए सबसे अहम राज्य महाराष्ट्र है, जहां लोकसभा की 48 सीटें हैं। पिछली बार भाजपा और शिव सेना गठबंधन को 41 सीटें मिली थीं। इस बार चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में एनडीए को 16 से 18 सीट मिलने का अनुमान जताया गया है। वह भी तब है, जब भाजपा के साथ शिव सेना और एनसीपी दोनों का एक एक धड़ा जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि भाजपा को एकनाथ शिंदे और अजित पवार से ज्यादा वोट की उम्मीद नहीं रह गई है। इन दोनों के साथ सत्ता के लोभ में विधायक, सांसद आदि तो भाजपा के साथ चले गए लेकिन मतदाता मोटे तौर पर उद्धव ठाकरे और शरद पवार के साथ ही रह गया।
तभी कहा जा रहा है कि भाजपा लोकसभा का चुनाव अकेले लड़ने की योजना पर भी काम कर रही है। भाजपा के नेताओं के लग रहा है कि 22 सीटें इन दो पार्टियों को देने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि वे जीतने की स्थिति में नहीं हैं। इसकी बजाय अगर भाजपा अकेले 47 या 48 सीटें लड़ती है तो वह बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। उसके अकेले लड़ने पर प्रदेश में मुकाबला त्रिकोणात्मक हो जाएगा। इसमें भी भाजपा को फायदा मिल सकता है क्योंकि एकनाथ शिंदे शिव सेना के उद्धव ठाकरे गुट का वोट काटेंगे और अजित पवार अपने चाचा शरद पवार की पार्टी को नुकसान पहुंचाएंगे। ध्यान रहे पिछली बार भाजपा ने 23 सीटें जीती थीं। उसके सामने इतनी सीटें बचाने की बड़ी चुनौती है।
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