Maharashtra politics

  • अडानी ने तुड़वाया अड़ानी ही जुड़वा रहे!

    जो काम कोई नहीं कर सका वह गौतम अडानी ने कर दिया। वे रविवार को बारामती पहुंचे थे, जहां उन्होंने शरदचंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्घाटन किया। इस मौके पर उनके एक तरफ शरद पवार थे तो दूसरी ओर अजित पवार थे। गौतम अडानी की पत्नी प्रीति अडानी भी कार्यक्रम में मौजूद थीं और कार्यक्रम का संचालन कर रही थीं बारामती की सांसद व शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले। सो, परफेक्ट मैदान सजा था। सुप्रिया सुले ने गौतम अडानी को भाई और उनकी पत्नी को भाभी बताया और बड़े प्यार व सम्मान से दोनों को...

  • बीएमसी चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ेगी

    मुंबई। महाराष्ट्र में शहरी निकाय चुनावों से पहले विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी में दरार आ गई है। कांग्रेस पार्टी ने बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी चुनाव में गठबंधन से अलग होने का ऐलान किया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्निथला ने कहा है कि पार्टी बीएमसी में अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय के चुनाव जमीनी स्तर पर होते हैं और जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी। रमेश चेन्निथला ने कहा, ‘लोकसभा और विधानसभा चुनाव हम महाविकास अघाड़ी के साथ मिलकर लड़े थे, लेकिन चूंकि यह स्थानीय चुनाव है,...

  • महाराष्ट्र में महायुति की परीक्षा

    महाराष्ट्र में पिछले साल प्रचंड बहुमत से महायुति यानी भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिव सेना और अजित पवार की एनसीपी की सरकार बनी थी। एक साल के बाद सरकार के इकबाल और गठबंधन की ताकत दोनों की परीक्षा होने वाली है। ग्रामीण निकायों के बाद अब राज्य चुनाव कार्यालय ने शहरी निकायों के चुनाव की घोषणा कर दी है, जिसमें बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का भी चुनाव है। बीएमसी और 28 अन्य नगर निकायों का चुनाव 15 जनवरी को होगा और 16 जनवरी को वोटों की गिनती होगी। बीएमसी के चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है और बाकी निकायों...

  • महाराष्ट्र में विपक्ष के नेताओं को थामना मुश्किल

    वैसे तो यह पूरे देश की परिघटना है लेकिन महाराष्ट्र में गजब हुआ है। पिछले चुनाव में यानी 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे महाविकास अघाड़ी की तीन पार्टियों के 43 उम्मीदवारों ने एक साल में पाला बदल लिया है। महाविकास अघाड़ी के ये उम्मीदवार महायुति यानी भाजपा के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हो गए हैं। सोचें, ये उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे थे इसका मतलब है कि अपने आप ये अपने क्षेत्र के शैडो विधायक थे। इनमें से कुछ उम्मीदवार तो बहुत कम अंतर से हारे थे और हो सकता है कि अगली...

  • एकनाथ शिंदे की मुश्किलें बढ़ रही हैं

    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मुश्किलें कम महीं हो रही हैं। वे पिछले एक साल से देवेंद्र फड़नवीस की सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनको सुकून नहीं मिल पाया है। कारण यह बताया जा रहा है कि फड़नवीस उनको निपटाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि कोई इस बात की पुष्टि नहीं करता लेकिन वे जितने परेशान हैं और जितनी बार दिल्ली पहुंच कर उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की है उससे लग रहा है कि सब कुछ ठीक नहीं है। हाल के दिनों में तो उनका विवाद और ज्यादा बढ़ गया। हालांकि अब कहा जा रहा...

  • मनसे की ज्यादतियों का जवाब उद्धव को देना होगा

    महाराष्ट्र में राज ठाकरे पूरी तरह से पस्त पड़े थे। भाजपा उनका इस्तेमाल करती थी लेकिन कभी ताकतवर नहीं बनाया। लेकिन उद्धव ठाकरे ने उनको पुनर्जीवित कर दिया है। बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का चुनाव जीतने के लिए उद्धव ठाकरे बेचैन हैं और उनको लग रहा है कि बिना राज ठाकरे के वे यह चुनाव नहीं जीत पाएंगे। राज ठाकरे के लिए वे कांग्रेस को छोड़ने के लिए भी तैयार हैं, जबकि मुंबई में कांग्रेस के पास राज ठाकरे की मनसे से ज्यादा वोट हैं। बहरहाल, उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई के साथ तालमेल की बात आगे बढ़ा दी...

  • सबसे कमाल गठबंधन महाराष्ट्र में है

    महाराष्ट्र जैसा गठबंधन देश के किसी और राज्य में देखने को नहीं मिलता है। वहां के पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक भी मजाक में एक गंभीर बात कहते हैं कि कांग्रेस और भाजपा को छोड़ कर महाराष्ट्र में कोई भी पार्टी किसी के भी साथ तालमेल कर सकती है। कांग्रेस और भाजपा की सहयोगी पार्टियां भी इनके साथ रहते हुए आपस में तालमेल कर सकती हैं। वहां की एक दिलचस्प बात यह भी है कि लोकसभा और विधानसभा से ज्यादा गंभीरता से वहां की पार्टी स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ती हैं और उसमें कोई किसी के साथ भी जा सकता है।...

  • महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा

    मुंबई। महाराष्ट्र में राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय निकायों के चुनाव की घोषणा कर दी है। हालांकि मुंबई, पुणे सहित कई बड़ी नगरपालिकाओं के चुनाव की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक चुनाव आयोग ने स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंगलवार को पहले चरण के चुनावों की घोषणा हुई है। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी दिनेश वाघमारे, सचिव सुरेश काकाने, उप सचिव सूर्यकृष्ण मूर्ति, उपायुक्त राजेंद्र पाटिल ने चुनावों का ऐलान किया। मुख्य चुनाव अधिकारी दिनेश वाघमारे ने राज्य की 246 नगर परिषदों और 42 नगर...

  • महाराष्ट्र में स्थानीय चुनाव का मामला उलझा

    चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का ऐलान कर दिया। पहले चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हो गई। पहले चरण के 12 राज्यों में महाराष्ट्र नहीं है। चुनाव आयोग ने बहुत साफ शब्दों में पहले ही कहा था कि जिन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं वहां एसआईआर की प्रक्रिया अभी नहीं शुरू होगी क्योंकि वहां के स्थानीय प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी चुनाव प्रक्रिया में व्यस्त होंगे। चुनाव आयोग को पता है कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव एक निश्चित समय...

  • फड़नवीस ने क्यों कहा कि दिल्ली दूर है?

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस हर समय कुछ न कुछ ऐसा कहते या करते रहते हैं, जिससे मुंबई से लेकर दिल्ली तक उनकी चर्चा होती रहती है। अब उन्होंने यह कह कर सबको चौंकाया है कि दिल्ली दूर है। उन्होंने एक कार्यक्रम में अचानक यह बात कही। किसी को समझ नहीं आया कि फड़नवीस ने क्यों कहा कि दिल्ली दूर है और किसके लिए यह बात कही। सबसे अहम सवाल यही है कि किसके लिए दिल्ली दूर है? क्या फड़नवीस ने यह बात अपने लिए कही है और यह संदेश दिया है कि वे दिल्ली के बारे में नहीं सोच...

  • महाराष्ट्र में सब कुछ ठीक नहीं

    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और शिव सेना के नेता एकनाथ शिंदे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। वे परिवार के साथ प्रधानमंत्री से मिलने गए थे। उन्होंने उप राष्ट्रपति के चुनाव में भाजपा की ओर से तय किए जाने वाले उम्मीदवार को बिना शर्त समर्थन का ऐलान किया। इसके साथ ही शिंदे ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में सब कुछ ठीक है और उनके व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के बीच कोई विवाद नहीं है। लेकिन उनके यह कहने का मतलब ही है कि विवाद चल रहा है। तभी फड़नवीस से ज्यादा शिंदे दिल्ली की दौड़ लगा...

  • उद्धव ने राज ठाकरे को संजीवनी दे दी

    जिस तरह से 2015 में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद, उनकी पार्टी और परिवार को संजीवनी दी थी उसी तरह महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई राज ठाकरे को दी है। हो सकता है कि इसका कुछ फायदा उद्धव ठाकरे को भी हो लेकिन राजनीति के हाशिए से भी धकेल कर बाहर कर दिए गए राज ठाकरे का पुनर्जीवन हो गया। गौरतलब है कि महाराष्ट्र के लोगों ने राज ठाकरे की विभाजनकारी राजनीति को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। गैर मराठी लोगों पर हमले या हिंदुत्व की राजनीति का उनका प्रयास पूरी तरह से नाकाम रहा...

  • सहकारिता में लौटे अजित पवार का दबदबा

    महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की ताकत दिन ब दिन बढ़ रही है। वे 40 साल के बाद सहकारिता की राजनीति में लौटे हैं। अजित पवार ने आखिरी बार 1984 में बारामती में सहकारिता का चुनाव लड़ा था। उसके बाद अब उन्होंने मालेगांव सहकारी चीनी मिल संगठन का चुनाव लड़ा। इसमें वे अध्यक्ष के पद पर लड़े थे और सभी 21 पदों के लिए उनका पैनल चुनाव लड़ा था। उनका पैनल 20 सीटों पर जीता है। वे अध्यक्ष पद का चुनाव लगभग 90 फीसदी वोट लेकर जीते हैं। उनके चाचा शरद पवार ने अध्यक्ष पद के लिए तो उम्मीदवार...

  • उद्धव को तालमेल से रोकने की कोशिश

    महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव जैसे जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो रहा है। यह साफ दिख रहा है कि उद्धव ठाकरे अपने चचेरे भाई राज ठाकरे से तालमेल करना चाहते हैं। तालमेल की शर्तें क्या होंगी इस पर चर्चा चल रही है। हालांकि ऐसा नहीं है कि राज ठाकरे की पार्टी बहुत बड़ी या लोकप्रिय है। संसद या विधानमंडल या महानगरपालिका कहीं भी उनका एक भी सदस्य नहीं है। फिर भी उद्धव को लग रहा है कि ठाकरे परिवार के एक होने से मुंबई की जनता में एक मैसेज जाएगा और परिवार वापस मुंबई...

  • पवार कुछ और चाहते हैं भतीजे अजित से

    एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने एक बार फिर पोजिशन बदली है। हालांकि यह भी अंतिम नहीं है लेकिन उन्होंने कहा है वे कभी भी उन लोगों के साथ नहीं जाएंगे, जो भाजपा के साथ जुड़े हैं। उन्होंने भतीजे अजित पवार की पार्टी एनसीपी में अपनी पार्टी के विलय की संभावना को नकार दिया है। साथ ही भाजपा पर निशाना साध कर सीधे भाजपा से तालमेल करने और एनडीए में शामिल होने की संभावना को भी खारिज कर दिया है। ध्यान रहे पिछले कुछ दिनों में उन्होंने कई बार अजित पवार के साथ मंच साझा किया और एक बार यह...

  • सुप्रिया सुले के कारण भाजपा में संशय

    महाराष्ट्र में शरद पवार और अजित पवार दोनों की पार्टियों के विलय की चर्चा जोर शोर से चल रही है। इसके अलावा यह भी चर्चा चल रही है कि विलय की बजाय शरद पवार पार्टी का स्वतंत्र अस्तित्व रखते हुए एनडीए में शामिल हो सकते हैं। भाजपा को दूसरी स्थिति ज्यादा बेहतर नजर आ रही है। विलय करके एनसीपी एक हो जाए और एनडीए में रहे तो यह एक मजबूत ताकत रहेगी और अलग होने पर ज्यादा नुकसान कर सकती है। लेकिन दो अपेक्षाकृत कमजोर पार्टियां एनडीए में रहेंगी तो वह ज्यादा बेहतर होगा। शरद पवार की पार्टी एनडीए में...

  • उद्धव ने दिया राज ठाकरे से तालमेल का संकेत

    मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे से तालमेल के संकेत दिए हैं। पिछले कई दिनों से दोनों पार्टियों की ओर से इसके संकेत दिए जा रहे थे लेकिन पहली बार उद्धव ने इतना स्पष्ट संकेत दिया है। उद्धव ने तालमेल की अटकलों के बीच शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र की जनता जो चाहेगी, वही होगा। हालांकि, उद्धव ठाकरे ने इस सवाल को टाल दिया कि क्या उनकी पार्टी और मनसे के बीच किसी तरह की बातचीत चल रही है। उद्धव ठाकरे से मुंबई में एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस...

  • मजबूरी का नाम छगन भुजबल

    छगन भुजबल को आखिरका मंत्री बनाना पड़ा। सरकार बनने के छह महीने बाद उनको सरकार में शामिल किया गया। अकेले उनके लिए मंगलवार की सुबह 10 बजे राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हुआ। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने उनको मंत्री पद की शपथ दिलाई। पिछले साल नवंबर में सरकार बनने पर उनके मंत्री नहीं बनाया गया था, जिससे वे खासे नाराज हुए थे। उससे पहले उनको राज्यसभा में लाकर दिल्ली भेजे जाने की चर्चा थी लेकिन वह वादा भी पूरा नहीं हुआ। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के शहरी निकायों के चुनाव कराने का आदेश दिया। सर्वोच्च अदालत...

  • शरद-अजित पवार साथ आ रहे ?

    शरद पवार और अजित पवार साथ आ रहे हैं। दोनों की पार्टियों के विलय की तैयारी हो रही है। खुद शरद पवार ने इसका संकेत दिया और उसके बाद अजित पवार के साथ सतारा में मंच साझा किया। एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने गुरुवार, आठ मई को कहा कि अगर दोनों पार्टियों का विलय हो जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विलय का फैसला उन्होंने पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और अपनी बेटी सुप्रिया सुले पर छोड़ दिया है। हालांकि ऐसा कुछ नहीं होता है। फैसला तो शरद पवार ने ही किया होगा...

  • एनसीपी का विलय हुआ तो कांग्रेस को फायदा

    शरद पवार और अजित पवार की पार्टियों का विलय होने की चर्चा चल रही है। अगर दोनों पार्टियां एक हो जाती हैं तो उसका सबसे बड़ा लाभ कांग्रेस को होगा। शरद पवार ने कांग्रेस का ही वोट लेकर राजनीति की थी। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से अलग होकर 1999 में अपनी पार्टी बनाई थी और अपने साथ साथ कांग्रेस के वोट आधार का एक अच्छा खासा हिस्सा ले गए थे। मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र में, जहां कांग्रेस का मजबूत आधार था वही पर शरद पवार की एनसीपी का भी आधार बना। पहले चुनाव में यानी 1999 में तो वे कांग्रेस से...

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