भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों को तोड़ कर पार्टी में शामिल तो करा लिया है लेकिन किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि राज्यसभा में भाजपा की संख्या बढ़ाने के अलावा उनकी क्या भूमिका होगी। खास तौर से यह सवाल राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल को लेकर है। ध्यान रहे दिल्ली में भाजपा पहले से मजबूत पार्टी रही है। भले 27 साल तक सरकार से बाहर रही लेकिन उसे 35 फीसदी के आसपास वोट हमेशा मिलते रहे। उसके पास नेता भी हैं। भाजपा ने रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बना दिया है।
अब सवाल है कि राघव चड्ढा का इस्तेमाल दिल्ली में होगा या पंजाब में? वे आम आदमी पार्टी से दिल्ली में विधायक थे और बाद में पंजाब के प्रभारी बने और राज्यसभा गए। पंजाब में भी भाजपा अगर उनको आगे करती है तो उसका अभी तक बनाया गया समीकरण बिगड़ेगा। उसने गैर सिख हिंदू नेता के तौर पर कांग्रेस से लाकर सुनील जाखड़ को आगे किया है। सिख नेता के तौर पर भी कांग्रेस से लाकर रवनीत सिंह बिट्टू को केंद्र में मंत्री बनाया गया है। कैप्टेन अमरिंदर सिंह का परिवार भी भाजपा के साथ जुड़ा हुआ है। ऐसे में अगर भाजपा राघव चड्ढा को वहां आगे करेगी तो इन नेताओं को क्या होगा? क्या ये सभी नेता कांग्रेस में वापस लौटेंगे?
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