यह लाख टके का सवाल है कि क्या एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई धुरी बन सकते हैं? इस बात की पूरी संभावना है कि राज्य की राजनीति में जो खालीपन आया है उसको भरने वाला चेहरा शिंदे का हो सकता है। असल में राज्य की राजनीति के सारे बड़े चेहरे अचानक राजनीतिक क्षितिज से गायब हो गए हैं। अजित पवार एक विमान हादसे में मारे जा चुके हैं और शरद पवार की उम्र और सेहत उनका साथ नहीं दे रही है। उनके साथ के या बाद के तमाम पुराने नेता चले गए है या अप्रासंगिक हो गए हैं। कांग्रेस में भी कोई मजबूत नेता नहीं बचा, जिसका पूरे महाराष्ट्र में असर हो। कहने को कई पूर्व मुख्यमंत्री अब भी महाराष्ट्र में राजनीति कर रहे हैं। लेकिन एक उद्धव ठाकरे को छोड़ दें तो चाहे पृथ्वीराज चव्हाण हों या अशोक चव्हाण या सुशील शिंदे किसी में देवेंद्र फड़नवीस या एकनाथ शिंदे को चुनौती देने का दम नहीं है। शिंदे एक दमदार जमीनी नेता हैं, राज्य के उप मुख्यमंत्री हैं और शिव सेना की राजनीतिक विरासत उनके पास है।
एकनाथ शिंदे की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे मराठा हैं और हिंदुत्व की राजनीति करते हैं। ध्यान रहे शरद पवार और अजित पवार के बाद अब कोई बड़ा मराठा नेता सक्रिय नहीं है। मराठाओं को यह भी समझ में आ रहा है कि भाजपा गैर मराठा राजनीति को आगे बढ़ा रही है। एक योजना के तहत भाजपा ने हर राज्य में राजनीतिक रूप से सबसे मजबूत जातियों की राजनीतिक हैसियत कम की है। मुसलमान से लेकर मराठा, जाट और आदिवासी तक के बारे में यह बात कही जा सकती है। अब कोई भी जाति यह क्लेम नहीं कर सकती है कि उसके बगैर सरकार नहीं बनेगी। यह बात मराठाओं को साल रही है। उनको विकल्प के रूप में एकनाथ शिंदे दिख रहे हैं। ऊपर से शिंदे का असर ठाणे, कल्याण से लेकर पूरे पश्चिमी महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में है। उन्होंने जमीन से राजनीति शुरू की है और शीर्ष तक पहुंचे हैं। इसलिए वे चुनौती बन सकते हैं। तभी कहा जा रहा है कि एक योजना के तहत दिल्ली से शिंदे को मजबूत बनाया जा रहा है कि वे देवेंद्र फड़नवीस को संतुलित रखें। इससे फड़नवीस को राज्य से बाहर दिल्ली के बारे में सोचने का समय नहीं मिलेगा।


