भारतीय जनता पार्टी हमेशा कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा अनुशासित पार्टी रही है। पिछले 12 साल में नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इस अनुशासन को और मजबूत किया। गोपनीयता का एक ऐसा ढांचा बनाया कि ज्यादातर फैसलों की जानकारी बड़े नेताओं तक को नहीं होती है। पार्टी के बाहर मीडिया को इस तरह से नियंत्रित किया कि सरकार और पार्टी के खिलाफ कोई भी खबर नहीं छपती है। अगर सचमुच की खबर होती भी है तो मीडिया के लोगों की जिम्मेदारी होती है कि वे इसके बचाव के तर्क खोजें और मामले को भटकाएं। लेकिन अचानक सारी चीजें बदल गई हैं। अब अंदरखाने की खबरें निकलने लगी हैं और मीडिया में छपने भी लगी हैं। सवाल है कि क्या पार्टी के अंदर कांग्रेस जैसी आपसी खींचतान शुरू हो गई है और नेता एक दूसरे के खिलाफ खबरें मीडिया को दे रहे हैं? और दूसरा सवाल यह है कि क्या मीडिया पर से नियंत्रण कम हुआ है, जो खबरें छपने भी लगी हैं? कहा जा रहा है की हीरेन जोशी अब कामकाज नहीं देख रहे हैं, जिसका कुछ असर दिख भी रहा है।
याद करें कैसे कांग्रेस की जब सरकार थी तब पी चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी कैसे एक दूसरे के ऊपर जासूसी के आरोप लगाते थे और कैसे एक दूसरे के खिलाफ खबरें मीडिया में आती थीं। कैसे सरकार की नीतियों के खिलाफ पार्टी के बड़े नेता अखबारों में लेख लिखते थे। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय भी ऐसा था। इसी वजह से उमा भारती ने अरुण जेटली पर खबरें प्लांट कराने का आरोप लगाया था और पार्टी भी छोड़ी थी। अब ऐसा ही कुछ भाजपा के अंदर हो रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ जमीन का जो मामला सामने आया, कहा जा रहा है कि भाजपा के ही नेताओं ने उसके कागजात निकाले और मीडिया तक पहुंचाया। बताया जा रहा है कि इसके कागजात काफी पहले सामने आ गए थे। लेकिन मीडिया में कोई छापने को तैयार नहीं था। तभी सवाल है कि अचानक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में कहां से यह हिम्मत आ गई कि उसने खबर छाप दी? इसी तरह राजस्थान के सांसद और केंद्र में कृषि व किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय से करीब एक करोड़ रुपए की सब्सिडी ले ली तो वह भी खबर इंडियन एक्सप्रेस में छप गई।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय कामकाज में तो फीसड्डी साबित हुआ ही है लेकिन जानकार सूत्रों के कहना है कि उनके खिलाफ जो व्यवस्थित अभियान चला है वह उन्हीं के राज्य के एक नेता की शह पर चला है। इससे भी हैरान करने वाला मामला बिहार का है। वहां एक एनकाउंटर को लेकर सरकार घिरी है, जिसमें भाजपा के विधायक, राज्य सरकार के मंत्री और अन्य नेता ही अपनी सरकार के खिलाफ हमलावर हो गए हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी के एक बड़े नेता परदे के पीछे से इस पूरे मामले को हवा दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश का मामला सबके सामने हैं। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में दिल्ली से लेकर लखनऊ तक कई तरह की खींचतान की खबरें हैं। महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस के बरक्स एकनाथ शिंदे को खड़ा करने की कोशिश के किस्से भी हैं। सो, मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान, ओडिशा से लेकर बिहार और महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक भाजपा के नेताओं में घमासान छिड़ा है। भाजपा के नेताओं की महत्वाकांक्षाएं उफान मार रही हैं और वे अपने प्रतिद्वंद्वी या संभावित प्रतिद्वंद्वी को निपटाने के प्रयास में लगे हैं।


