एक तरफ केंद्र सरकार इस बात की तैयारी कर रही है कि नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन हो और परिसीमन बिल पास हो ताकि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने के फैसले को जनगणना की बाध्यता से मुक्त किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने दो तिहाई बहुमत जुटाने का अभियान युद्ध स्तर पर छेड़ा है। तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद अब सरकार के साथ हैं और उद्धव ठाकरे की पार्टी के भी छह सांसद अब एनडीए के साथ हैं। शरद पवार की पार्टी के भी सभी आठ सांसदों का नहीं तो कम के कम छह सांसदों का समर्थन सरकार को मिलेगा। लेकिन असली खेल डीएमके सुप्रीम एमके स्टालिन के हाथ में है।
अगर स्टालिन की पार्टी के 22 सांसद किसी भी तरह से सरकार का समर्थन करते हैं तो फिर सरकार कामयाब होगी। अगर स्टालिन पहले वाले स्टैंड पर कायम रहे और परिसीमन का विरोध किया तो फिर सरकार को मुश्किल होगी। तभी सरकार और विपक्ष दोनों स्टालिन के स्टैंड का इंतजार कर रहे हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि दोनों को भरोसा है कि स्टालिन उनके हिसाब से काम करेंगे। राहुल गांधी को लग रहा है कि स्टालिन किसी हाल में अपना स्टैंड नहीं बदल सकते हैं। उन्होंने अप्रैल में सरकार के इस बिल का सबसे आक्रामक तरीके से विऱोध किया था। ऐसे में वे कैसे इस बिल का समर्थन कर सकते हैं। राहुल ने पार्टी के संसदीय रणनीतिकारों के साथ बैठक में उम्मीद जताते हुए कहा कि तमिलनाडु की कोई भी पार्टी परिसीमन बिल का समर्थन करने की हिम्मत नहीं जुटा सकती है। वह राज्य की राजनीति में अलग थलग हो जाएगी। हालांकि कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि राहुल को इस उम्मीद में बैठे नहीं रहना चाहिए, बल्कि आगे बढ़ कर स्टालिन से बात करनी चाहिए। हालांकि इसकी उम्मीद कम है।
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