तमिलनाडु में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो गया लगता है। राहुल गांधी की तमिलनाडु यात्रा के बाद शांति बहाल हो गई है। कांग्रेस के नेताओं ने अलग होकर लड़ने या फिल्म स्टार विजय की नई बनी पार्टी टीवीके से तालमेल की बातें बंद कर दी हैं। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने साफ संदेश दिया है कि डीएमके से मिल कर ही लड़ना है। दूसरी ओर डीएमके ने साफ कर दिया कि वह पिछली बार के मुकाबले एक भी ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं है। पिछली बार डीएमके ने कांग्रेस के लिए 25 विधानसभा सीटें छोड़ी थीं। यह एक तय फॉर्मूले के हिसाब से हुआ था। ध्यान रहे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अपेक्षाकृत काफी ज्यादा नौ सीटें मिलती हैं। लेकिन विधानसभा चुनाव में डीएमके ज्यादा सीटों पर लड़ती है।
डीएमके ने इस बार भी 25 सीटों देने की सूचना कांग्रेस को दे दी है। डीएमके और कांग्रेस के अलावा इस गठबंधन में 10 पार्टियां हैं और इस बार फिल्म स्टार कमल हसन की पार्टी भी एमएनएम भी साथ मिल कर लड़ेगी। इतना ही नहीं एमके स्टालिन डीएमडीके को भी गठबंधन में लाना चाहते हैं। फिल्मस्टार कैप्टेन विजयकांत ने यह पार्टी बनाई थी। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी पार्टी संभाल रही हैं। सो, डीएमके को अपने कोटे की 75 सीटों में से भी कुछ सीटें छोड़नी पड़ सकती हैं। वह मुस्लिम लीग को तीन सीटें देती है लेकिन इस बार उसकी भी मांग एक दो ज्यादा सीट की है। वाइको की पार्टी एमडीएमके स्टालिन की पार्टी डीएमके के चुनाव चिन्ह पर लड़ती है लेकिन उसके लिए छह सीटें छोड़नी पड़ती है। इसके अलावा वीसीके, सीपीआई और सीपीएम के लिए भी छह छह सीटें छोड़नी पड़ती है। तीन अन्य पार्टियां भी डीएमके के चुनाव चिन्ह पर ही लड़ती हैं लेकिन उनके लिए सीटें छोड़नी पड़ती हैं।
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