राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

मनमर्जी से उपचुनाव कराता है आयोग!

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग का इकलौता काम होता है। पिछले कुछ समय से इस इकलौते काम में इतनी गड़बड़ियां हो रही हैं और इतने सवाल उठ रहे हैं कि पूछिए मत। लेकिन चुनाव आयोग को कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह अपनी मनमर्जी से फैसले कर रहा है। अभी चुनाव आयोग ने तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की है। लेकिन अन्य राज्यों में उपचुनावों के बारे में फैसला नहीं किया है। सोचें, चुनाव आयोग को लोकसभा की 543 और राज्यों की विधानसभाओं की 43 सौ सीटों के साथ साथ स्थानीय निकायों की लाखों सीटों के चुनाव एक साथ कराने हैं लेकिन वही आयोग पांच राज्यों में एक साथ उपचुनाव नहीं करा पाता है। तभी सवाल है कि उपचुनाव कराने का क्या नियम है? कुछ राज्यों के उपचुनाव जल्दी क्यों कराए जा रहे हैं और कुछ राज्यों में देरी क्यों की जा रही है? एक दर्जन सीटों पर उपचुनाव ऐसा काम तो नहीं है कि कराने के लिए कर्मचारी और सुरक्षा बल नहीं मिल रहे हैं? बाढ़ और बारिश का भी बहाना नहीं चलेगा क्योंकि जिन राज्यों में उपचुनाव होने हैं उनकी स्थिति एक जैसी है।

चुनाव आयोग ने बिहार की बांकीपुर सीट, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात के मंजलपुर सीट पर उपचुनाव की घोषणा की है। तीनों सीटों पर छह जून से नामांकन शुरू हो गया है। 30 जून को वोटिंग होगी और तीन अगस्त को नतीजे आएंगे। इसमें एक सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की है। उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने के बाद 30 अप्रैल को बांकीपुर सीट से इस्तीफा दिया था। दूसरी सीट कांग्रेस के राजेंद्र भारती की है। उनको एक मामले में सजा होने के बाद सीट खाली हुई है। वहां से भाजपा के नरोत्तम मिश्रा चुनाव हारे थे। तीसरी सीट गुजरात की है, जो भाजपा विधायक के निधन से खाली हुई थी।

सोचें, मई में पश्चिम बंगाल की दो सीटें खाली हुई हैं। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी दो सीट से जीते थे और उन्होंने अपनी नंदीग्राम सीट खाली कर दी है। इसी तरह दो सीटों से जीते हुमायूं कबीर ने एक सीट छोड़ दी है। लेकिन चुनाव आयोग ने इन दोनों सीटों पर उपचुनाव की घोषणा नहीं की है। लोग सोचते रहें कि क्या कारण हो सकता है बिहार के साथ ही उपचुनाव नहीं कराने का! ऐसे ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय दो सीट से चुनाव जीते थे। मई में उन्होंने भी अपनी एक सीट से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन उस सीट पर भी उपचुनाव नहीं हो रहा है। तमिलनाडु में अन्ना डीएमके के छह विधायकों ने इस्तीफा दिया है और छह सीटें खाली हैं। लेकिन आयोग ने वहां उपचुनाव की घोषणा नहीं की।

ध्यान रहे चुनाव आयोग पर विपक्ष हमेशा यह आरोप लगाता रहता है कि वह भाजपा को मदद पहुंचाने के लिए फैसले करती है। इस मामले में भी यह आरोप लग रहा है। कहा जा रहा है कि बांकीपुर सीट पर जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर की तैयारियों से भाजपा घबराई हुई थी। उसको लग रहा था कि अगर प्रशांत किशोर को ज्यादा समय मिला तो वे बांकीपुर में माहौल भाजपा के खिलाफ बना सकते हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के लिए इसलिए प्रतिष्ठा की सीट है क्योंकि वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट है और इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला चुनाव है। यह भाजपा सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह की तरह हो जाएगा। इसलिए बाकी राज्यों से अलग करके आनन फानन में बांकीपुर सीट पर उपचुनाव की घोषणा हुई है। आम आदमी पार्टी लोगों के बीच इसका प्रचार कर रही है। कहा जा रहा है कि असल मामला बांकीपुर का ही था। लेकिन अकेले चुनाव कराते तो ज्यादा सवाल उठता इसलिए दो और सीटें जोड़ दी गईं।

By NI Political Desk

Get insights from the Nayaindia Political Desk, offering in-depth analysis, updates, and breaking news on Indian politics. From government policies to election coverage, we keep you informed on key political developments shaping the nation.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

4 × four =