केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में नियुक्ति के नियमों को बदलने का विवाद खत्म नहीं हो रहा है। सरकार जो नया कानून बना रही है उसके हिसाब से अर्धसैनिक बलों जैसे सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी या एसएसबी में महानिरीक्षक यानी आईजी स्तर के 50 फीसदी पद आईपीएस के लिए आरक्षित होंगे। इसी तरह एडीजी के लिए दो तिहाई यानी 67 फीसदी पद आईपीएस को मिलेंगे और डीजी स्तर के सारे पदों पर आईपीएस ही बहाल होंगे। इसका अर्थ है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अपने कैडर के अधिकारी कभी भी शीर्ष पद पर नहीं पहुंच पाएंगे। इसे लेकर विवाद बहुत बढ़ गया है।
अलायंस ऑफ ऑल इंडिया पैरा मिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष एचआर सिंह ने इस कानून को लेकर कहा है कि केंद्र सरकार शाहबानो प्रकरण दोहरा रही है। गौरतलब है कि शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला को भरण पोषण का भत्ता देने का कहा था और मुस्लिम संगठनों के दबाव में सरकार ने संसद से कानून बना कर इस आदेश को पलट दिया था। उसी तरह अर्धसैनिक बलों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस की बजाय कैडर के अधिकारियों की संख्या बढ़ाने और आईपीएस की संख्या घटाने का आदेश दिया था। उसे पलटने के लिए सरकार नया कानून बना रही है। गौरतलब है कि आर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस 1986 से है, जिसमें अर्धसैनिक बलों के साथ साथ 50 से ज्यादा सेवाएं हैं। सरकार का कहना है कि आईपीएस की संख्या बढ़ाने से राज्यों के साथ तालमेल बेहतर होगा तो दूसरी ओर पूर्व अधिकारी कह रहे हैं कि टकराव बढ़ेगा। कई लोग इसे कानूनी रूप से चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। ध्यान रहे अर्धसैनिक बलों में 13 हजार अधिकारी और 12 लाख जवान हैं।


