यह बड़ी हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में भाषण दिया तो कहा कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। हर दिन कई मंत्रालयों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही है तो उसमें कहा जा रहा है कि तेल और गैस की कोई कमी नहीं है। लेकिन असल में पूरे देश में तेल और गैस की कमी है। यह मानने में सरकार को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। हालांकि हो सकता है कि सरकार कमी स्वीकार कर ले तो और ज्यादा पैनिक हो जाए। लेकिन किसी न किसी तरह से लोगों को इसकी जानकारी मिल रही है। तभी लोग तेल और गैस के लिए लाइन लगा रहे हैं।
असल में भारत की बड़ी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों ने उधार तेल देना बंद कर दिया है। पहले खुदरा विक्रेताओं या पेट्रोल पम्प वालों को टैंकर लेने के लिए एडवांस भुगतान नहीं करना पड़ता था। इंडियन ऑयल तो पांच दिन का क्रेडिट देता था। यानी पम्प मालिक तेल लेने के बाद पैसा देते थे। अब कंपनियों ने पैसा पहले लेना शुरू किया है। इससे ग्रामीण इलाकों में सप्लाई प्रभावित हुई थी। तभी लोग बड़े पेट्रोल पम्प पर जाकर लाइन लगने लगे हैं। ऐसे ही रसोई गैस के सिलेंडर की सप्लाई कम है तो लोग चार बजे सुबह से लाइन लग रहे हैं। सरकार लोगों से पीएनजी कनेक्शन यानी पाइप लाइन गैस की ओर शिफ्ट करने को कह रही है। लेकिन राजधानी दिल्ली में बुधवार को कुछ इलाकों में पीएनजी की सप्लाई भी बंद रही। रसोई गैस का सिलेंडर लेने के बाद तो नागरिक उसका मालिक खुद होता है लेकिन पीएनजी कनेक्शन में तो मालिक सरकार है। वह जब चाहे और जितनी देर के लिए चाहे कनेक्शन बंद कर सकती है।


