कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा की जगह लाए गए नए रोजगार कानून के नाम का मसला सुलझा लिया है। कांग्रेस के नेता इसे जी राम जी बिल नहीं कह रहे हैं। राहुल गांधी सहित कांग्रेस के सारे नेता इसे वीबी ग्रामजी कानून कह रहे हैं। तकनीकी रूप से यह बिल्कुल सही है। कानून का नाम विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण इसे संक्षिप्त रूप में वीबी जी राम जी भी बोल सकते हैं और वीबी ग्रामजी भी बोल सकते हैं। कांग्रेस ने इसे वीबी जी ग्रामजी कहना शुरू किया है। इस बारे में कांग्रेस नेताओं के अपने तर्क हैं। उनका कहना है कि जब कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने मिल कर एक गठबंधन बनाया, जिसका नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इन्क्लूसिव अलायंस यानी ‘इंडिया’ रखा तो भाजपा और उसके नेताओं ने इसका मजाक उड़ाया। कांग्रेस चाहती थी कि इसे ‘इंडिया’ कहा जाए। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कांग्रेस के तमाम नेताओं ने इसे इंडी गठबंधन कहना शुरू किया।
सो, जिस तरह से भाजपा ने इंडिया को इंडी गठबंधन बनाया वैसे ही कांग्रेस ने जी राम जी को ग्रामजी बना दिया है। दोनों में तकनीकी रूप से कोई गलती नहीं है। अब सवाल है कि क्या भाजपा को इंडिया बोलने में समस्या थी या कांग्रेस को जी राम जी कहने में समस्या है? कांग्रेस के नेता यही सवाल उठा रहे हैं। उनसे जब पूछा जा रहा है कि आखिर राहुल गांधी या कांग्रेस के दूसरे नेता जी राम जी की जगह वीबी ग्रामजी क्यों कह रहे हैं तो उनका यही सवाल है कि भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के नेता इंडिया की जगह इंडी गठबंधन क्यों कहते थे? सवाल जायज है और तर्कसंगत है।
असल में दोनों पार्टियों में से कोई भी दूसरे के नैरेटिव को आगे बढ़ना नहीं चाहता है। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां चाहती थीं कि उनको पूरे देश का प्रतिनिधि माना जाए इसलिए उन्होंने इधर उधर के शब्दों को जोड़ कर गदठबंधन का नाम इंडिया नाम रख लिया। इसी तरह भाजपा रोजगार योजना से महात्मा गांधी का नाम हटा रही थी इसलिए उसने उसकी जगह कई शब्दों को तोड़ मरोड़ कर रामजी का नाम बना दिया। कांग्रेस के सामने इसके बावजूद मुश्किल यह है कि भाजपा ने जब इंडिया को इंडी गठबंधन कहना शुरू किया तो उतना नोटिस नहीं किया गया क्योंकि भाजपा ने खुद को भारत और राष्ट्रवाद का प्रतिनिधि बना रखा है। इसके उलट जब कांग्रेस और राहुल गांधी ने जी राम जी नहीं कहा तो वह मुद्दा बन गया क्योंकि रामजी के प्रति कांग्रेस नेताओं और उसकी सरकारों का जो रवैया रहा है उसे भाजपा पहले से मुद्दा बनाती रही है। तभी जब राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस की ओर से आयोजित मनरेगा बचाओ कार्यक्रम में मजाक उड़ाने के अंदाज में कहा कि क्या नाम रखा है सरकार ने कानून वीबी ग्राम जी, तो इसका मुद्दा बना।
ध्यान रहे राहुल गांधी अभी तक अयोध्या में राम मंदिर नहीं गए हैं। खबर आई थी कि वे रक्षा मामलों की संसदीय समिति के साथ 23 जनवरी को अयोध्या जा सकते हैं। लेकिन राहुल नहीं गए। 2024 की जनवरी में मंदिर का उद्घाटन हुआ था और उसके बाद मंदिर का शिखर भी पूरा हो चुका है। इसी तरह कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने राम सेतु के मसले पर सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में राम के अस्तित्व पर सवाल उठाया था। हालांकि बाद में उसे बदला गया था। इसलिए राहुल गांधी के राम का नाम नहीं लेने का मुद्दा बन गया, जबकि भाजपा द्वारा इंडिया नहीं बोलना इतना बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया।
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