तेलंगाना में कुछ दिलचस्प होने की संभावना है। पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता को पार्टी से निकाला गया तो उन्होंने पार्टी और विधान परिषद की सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके भाई केटी रामाराव उनके पिता चंद्रशेखर राव को गुमराह कर रहे हैं और भाजपा के साथ ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। संभवतः इसलिए उप राष्ट्रपति के चुनाव में चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति दोनों उम्मीदवारों से समान दूरी रखी। पार्टी के चार राज्यसभा सांसदों ने चुनाव में गैरहाजिर रहने का फैसला किया।
अब सवाल है कि आगे क्या होगा? क्या बीआरएस तेलंगाना की राजनीति में भी दोनों गठबंधनों से तटस्थ रहेगी? उससे बड़ा सवाल है कि के कविता क्या करेंगी? उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता छोड़ी तभी से यह कहा जा रहा है कि वे कांग्रेस के साथ जा सकती हैं। कांग्रेस ही उनको वापस विधान परिषद की सदस्यता दिला सकती है। दूसरे, वे अगर भाजपा से दूरी रखना चाहती हैं तो उसका भी रास्ता यह है कि कांग्रेस के साथ रहें। हालांकि एक संभावना यह जताई जा रही थी कि वे पहले अपनी पार्टी बना कर राजनीति करने का रास्ता चुन सकती हैं।
एकीकृत आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वाईएसआर कांग्रेस की बेटी वाईएस शर्मिला ने ऐसा ही किया था। जब भाई जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र की सत्ता पर अपना वर्चस्व बना लिया तो शर्मिला ने अलग पार्टी बनाई थी और अभी वे आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रमुख हैं। सो, देखना है कि कविता सीधे कांग्रेस में शामिल हो जाती हैं या शर्मिला की तरह पहले अपनी पार्टी बना कर राजनीति करती हैं।
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