यह ऐसा प्रश्न बन गया है, जिसका कोई जवाब नहीं दे पा रहा है। 2022 में सरकार बनने के बाद से पिछले चार साल में योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में कोई बदलाव नहीं हुआ है। एकाध वैकेंसी होने पर मंत्री बनाना या एकाध विभाग बदलना अलग बात है। लेकिन चार साल से ज्यादा समय तक मंत्रिमंडल में बदलाव नहीं होना भी एक अनहोनी सी बात है। ऊपर से इसे लेकर ज्यादा चर्चा इस वजह से भी है कि हर दो या तीन महीने पर मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा होती है और फिर चर्चा रूक जाती है।
पिछले दिनों ऐसा लगा था कि अब निश्चित रूप से मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। दिल्ली और लखनऊ के बीच भागदौड़ शुरू हो गई थी। जानकार सूत्रों के हवाले से खबर आई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंत्रिमंडल में फेरबदल की मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि अगले साल मार्च में विधानसभा चुनाव है। इसलिए अगर नए सिरे से जातीय समीकरण साधने का प्रयास होता है तब भी मंत्रियों को काम करने के लिए समय मिलना चाहिए। सारी भागदौड़ के बावजूद गाड़ी आगे नहीं बढ़ी। अब भी प्रयास चल रहे हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री के करीबी मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। हफ्ते दिन तक फिर कयास चलती रहेगी।
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