वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल निशाने पर हैं। असल में अब तक मोदी भक्ति करते रहे अनिल अग्रवाल ने पिछले दिनों सरकार की दुखती नस पर हाथ रख दिया था। उन्होंने जेपी समूह का अधिग्रहण अडानी समूह द्वारा किए जाने को चुनौती दी थी। वे अदालत पहुंचे थे, जहां उन्होंने कहा कि उनकी बोली बड़ी थी इसके बावजूद अडानी समूह को कंपनी सौंप दी गई। हालांकि कोर्ट से भी उनको कोई राहत नहीं मिली। उसके बाद ही तय हो गया था कि अब उनके ऊपर किसी न किसी रूप में गाज गिरेगी।
संयोग ऐसा हुआ कि इस घटना के थोड़े दिन बाद ही उनके एक प्लांट में बॉयलर फटने से धमाका हो गया और उसमें 20 से ज्यादा लोग मारे गए। इससे धारणा तो प्रभावित हुई ही लेकिन आनन फानन में कंपनी के साथ साथ चेयरमैन अनिल अग्रवाल के ऊपर भी एफआईआर दर्ज कर दी गई। यह सामान्य धारणा बनी है कि थोड़े दिन में वेदांता समूह को बरबाद किया जाएगा और किसी चहेते उद्योगपति के हाथों सौंप दिया जाएगा। बहरहाल, इस विवाद के बीच भाजपा के सांसद नवीन जिंदल ने अनिल अग्रवाल की तरफदारी की है और कहा है कि किसी सरकारी उपक्रम में हादसा होता है तो क्या उसके चेयरमैन पर मुकदमा होता है। भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री प्रत्याशी और पूर्व उप राज्यपाल किरण बेदी ने भी अनिल अग्रवाल का समर्थन किया है।


