ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस पार्टी के दांव इन दिनों सही पड़ रहे हैं। देखना है कि कब तक ऐसा चलता है। 60 साल के बाद कांग्रेस तमिलनाडु की सरकार में शामिल हुई है। उसके नेताओं का सत्ता का सूखा समाप्त हुआ है। लेकिन इतना ही नहीं सरकार चला रही विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी टीवीके ने राज्यसभा की एक सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी है। सोचें, कांग्रेस के सिर्फ पांच विधायक हैं। ऐसा माना जा रहा था कि अन्ना डीएमके के सीवी षणमुगम के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट पर उपचुनाव में टीवीके अपने किसी नेता को भेज कर खाता खोलेगी। लेकिन उसने कांग्रेस के लिए सीट छोड़ दी।
कांग्रेस इस एक सीट पर प्रवीण चक्रवर्ती को उम्मीदवार बना सकती है। उन्होंने कांग्रेस और डीएमके गठबंधन में रहते हुए भी डीएमके सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए थे। इससे ठीक पहले यानी अप्रैल में भी उसे एक सीट का फायदा हुआ था। अप्रैल में उसने एक राज्यसभा सीट डीएमके से ले ली थी। तब भी विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों की संख्या 18 ही थी। लेकिन विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे में ज्यादा सीट लेने का दबाव बना कर कांग्रेस ने उसके लिए मोलभाव के दौरान एक राज्यसभा सीट अपने लिए ले ली थी। कांग्रेस ने क्रिस्टोफर तिलक को उस सीट से उच्च सदन में भेजा है।


