Artificial Intelligence

  • मूर्खता की उत्पादकता

    दुनिया की AI दौड़ बाजार बनने यानी इस्तेमाल भर की नहीं है। Stanford AI Index 2026 के अनुसार अमेरिका ने 2025 में 59 उल्लेखनीय AI मॉडल बनाए, चीन ने 35। चीन AI शोध-पत्रों, citations और patent grants में आगे है, जबकि अमेरिका notable models और अधिक प्रभावशाली patents में आगे है। अमेरिका में 2025 का निजी AI निवेश 285.9 अरब डॉलर था। चीन का निजी निवेश 12.4 अरब डॉलर था, हालांकि Stanford खुद चेताता है कि इससे चीन के सरकारी निवेश की पूरी तस्वीर नहीं मिलती। यानी वहां लड़ाई prompt लिखने की नहीं, model, compute, chip, research, patent और पूरी...

  • दुनिया में अलग ही चिंताए

    दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर बहुत कुछ हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि एआई का जो खतरा दूर भविष्य में बताया जा रहा था वह अभी आ गया है। सारे दिग्गज इसे लेकर चिंतिंत हैं और इस क्षेत्र के तीन सबसे बड़े लोगों सैम ऑल्टमैन, डारियो आमोदेई और इलॉन मस्क ने इसके विकास की रफ्तार कम करने की जरुरत बताई है। सबको लग रहा है कि बहुत जल्दी यह इंसान के नियंत्रण से बाहर हो जाएगा। पिछले दिनों एआई ने जो किया उससे लोगों की चिंता और बढ़ी है। एआई ने अपने को इंसान बता...

  • अनियंत्रित छोड़ना ठीक नहीं

    एंथ्रोपिक के वर्तमान कर्मचारी इवान हुबिंगर ने यह कह कर सनसनी फैला दी है कि उन्हें यह संभावना 10 प्रतिशत से अधिक लगती है कि अगले दशक में एआई से मानव का सर्वनाश हो सकता है। अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनियों से हाल में हुए इस्तीफों ने मानव समुदाय के सामने मौजूद एक गहरे संकट पर रोशनी डाली है। एआई की दो बड़ी कंपनियों- ओपन एआई और एंथ्रोपिक में काम करने के बाद 27 वर्षीय रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने एंथ्रोपिक से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि ये कंपनियां एआई मॉडल्स को उस अवस्था में पहुंचाने पर आमादा...

  • यही तो आशंका है

    जेनरेटिव एआई से छात्र अवधारणाओं को बिना समझे असाइनमेंट पूरा कर लेते हैं। एआई पर निर्भरता उनके मानसिक प्रयास को कमजोर कर देती है। मगर जब एआई का सहारा नहीं रहता, तो वे पिछड़ जाते हैँ। जो अब तक आशंका थी, उसकी पुष्टि अब ठोस अध्ययन से होने लगी है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस उपकरणों का इस्तेमाल बच्चे पढ़ाई-लिखाई में करने लगें, तो मानसिक क्रिया के जरिए सीखने और यादाश्त गहरी होने के मामले में वे पीछे रह जाएंगे। एक प्रॉम्प्ट से गणित के आम जोड़-घटाव, गुणा-भाग आदि के जवाब हाजिर हो जाएं, तो दिमागी गणना की क्षमता विकसित करने की जरूरत...

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन एवं डिजिटल नवाचार के माध्यम से झारखंड को देश का अग्रणी एआई राज्य बनाने की दिशा में सरकार का रोडमैप

    एआई आधारित सुशासन, डिजिटल अवसंरचना, निवेश, नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से विकसित झारखंड के निर्माण की रूपरेखा। नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के दौरान झारखंड सरकार ने राज्य के डिजिटल परिवर्तन को गति देने तथा झारखंड को सार्वजनिक प्रशासन आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत इस विजन का उद्देश्य शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग एवं नागरिक सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करते हुए पारदर्शी, त्वरित, जवाबदेह एवं डेटा आधारित...

  • हमारी भूमिका दर्शक की!

    नई दुनिया को परिभाषित करने वाली तकनीकों में अपना प्रतिमान बनाने की होड़ में भारत बहुत पीछे छूट गया है। नतीजतन अमेरिकी या चीनी प्रतिमानों में से किसी एक पर निर्भर होना हमारी नियति बन गई है। खबर है कि फेबल-5 और माइथोस-5 जैसे उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस मॉडल्स तक विदेशियों की पहुंच रोकने के डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के आदेश के बाद भारत की बड़ी कंपनियां भी चीन के ऑपेन सोर्स मॉडल वाले एआई एजेंट्स की सेवाएं ले रही हैं। सस्ता होने के कारण स्टार्ट-अप कंपनियों के बीच पहले से ही चीनी मॉडल लोकप्रिय हैं। स्पष्टतः यह रुझान हाई टेक क्षेत्र...

  • यह चुनौती गंभीर है

    छात्र एआई के जरिए अपना टास्क पूरा कर रहे हैं। इससे वे नंबर ज्यादा ला रहे हैं, लेकिन सीख कम रहे हैं। इस कारण रोजगार बाजार में उनकी चुनौतियां बढ़ेंगी। उनकी नौकरी पर खतरा मंडराएगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल से विश्वविद्यालयों में छात्र नंबर ज्यादा ला रहे हैं, लेकिन उनका सीखना घट गया है। यह निष्कर्ष यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया के एक अध्ययन पत्र का है। अध्ययन अमेरिका के टेक्सस विश्वविद्यालय के 84 विभागों में आठ साल (2018 से 2025 तक) के दौरान शिक्षा ग्रहण करने वाले पांच लाख छात्रों पर किया गया। चूंकि अमेरिका एआई में अग्रणी देश है, अतः...

  • नौकरी गंवाने के नए तनाव

    31 मार्च को कोठानूर इलाके के एक हाई-राइज अपार्टमेंट में एक युवा तकनीकी जोड़ी ने आत्महत्या कर ली। पति भानुचंद्र रेड्डी (32) और पत्नी बीबी शाजिया सिराज (31)। दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर, दोनों की कमाई लाखों में, अमेरिका में काम का अनुभव, 80 लाख का सालाना पैकेज और सफलता की सारी बाहरी निशानियां। लेकिन अंदर से? बेंगलुरु, जिसे भारत की आईटी राजधानी के नाम से भी जाना जाता है, पिछले दिनों एक ऐसी घटना से हिल गया है जो न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर देती है। गत 31 मार्च को कोठानूर...

  • बड़ा खतरा बन सकता है एआई

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर गजब का यूफोरिया मचा है। हर जगह एआई की चर्चा है। मीडिया में एआई के जरिए कामकाज होने की खबरें हैं तो लीगल सर्किल में एआई की चुनौतियों की चर्चा है। कॉरपोरेट हाउसेज और इंड्रस्ट्रीज में इस बात पर मंथन चल रहा है कि एआई का इस्तेमाल करके कैसे ज्यादा से ज्यादा उत्पादन और मुनाफा हो। यहां तक कि राजनीतिक दलों के कार्यालयों में एआई की सबसे ज्यादा चर्चा है। सब अपने अपने हिसाब से एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो इस्तेमाल नहीं कर रहा है वह भी इसकी चर्चा कर रहा है।...

  • खतरा आ पहुंचा है

    एआई के कारण नौजवानों के लिए मध्यवर्गीय जिंदगी का सपना लगातार दूर होते जाने की आशंका है। भारत के नीतिकारों को इसका आभास है। मगर उनके पास इसका ठोस एवं सार्थक समाधान भी है, ऐसा कोई संकेत उन्होंने नहीं दिया है।       आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से वित्त, प्रबंधन, कंप्यूटर साइंस, गणित, इंजीनियरिंग, विधि और कार्यालय प्रशासन के क्षेत्रों में मौजूद रोजगार पर सबसे अधिक खतरा है। इन क्षेत्रों में एआई के जरिए सबसे पहले उन कार्यों को करना शुरू किया गया है, जिसे सबसे जूनियर कर्मचारी करते हैं। यानी जो नौजवान इन क्षेत्रों में करियर बनाने की उम्मीद लिए बैठे हैं,...

  • एआईः भय या भाग्य?

    भारत एआई क्रांति में अग्रणी तब होगा, जब उसका अपना लार्ज लैंग्वेज मॉडल होगा और उस पर आधारित प्लेटफॉर्म होंगे, जिनका इस्तेमाल भारत के लोगों के साथ साथ दुनिया के लोग भी करेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो यहां भी हम सेक्टर स्पेशिफिक एप्लीकेशन बनाते रह जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के उद्घाटन भाषण में वैसे तो कई बातें कहीं लेकिन पूरे भाषण का सार यह है कि इसे भय के तौर पर देखा जाए या भाग्य के तौर पर। उन्होंने कहा कि कुछ लोग एआई को भय के तौर पर देख रहे हैं लेकिन...

  • एआई से डरने की बात नहीं, बशर्ते…

    एआई का जिस तेजी से विकास हो रहे है और उसके नए-नए टूल्स आ रहे हैं, उससे मौजूदा अर्थव्यवस्था के बीच रोजगार बाजार में उथल-पुथल मचना तय है। लेकिन तकनीक के बदलाव को रोका नहीं जा सकता। फिर भी लोग विकल्पहीन नहीं हैं। उनके पास नई आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था बनाने का विकल्प मौजूद है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) रिसर्च एवं डेवलमेंट कंपनी एंथ्रोपिक के नए एआई टूल्स ने शेयर बाजारों में उथल-पुथल मचाई। यह जनवरी 2025 में चीन के चैटबॉट डीपसीक के लॉन्च होने पर मची उथल-पुथल जितनी व्यापक तो नहीं थी, फिर भी टेक कंपनियों के शेयरों के भाव में काफी...

  • भारत AI का भी बाज़ार बना!

    इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल्ली से हल्ला होगा कि भारत उनकी कमान में AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता – नकली बुद्धि) का विश्व गुरु बना। देखो, दुनिया आई है और भारत से ज्ञान ले रही है! सवाल है इस नकली बात का असल क्या है? वही है जो इस 12 फरवरी को देश के कई इलाकों में मज़दूर संघों और किसान संगठनों के नारों में गूंजा। इनका नारा था- नरेंद्र मोदी, सरेंडर मोदी। सो, भले इस सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी को फोटोशूट से फुरसत नहीं हो। उन्हें फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला के गले लगना है। वैश्विक...

  • एआई की दौड़ में भारत फिसड्डी है!

    भारत की एआई दौड़ से बहिष्कृति एक गहरी संरचनात्मक विफलता की निशानी है—एक ऐसी तकनीकी खाई जिसे बिना क्रांतिकारी बदलाव के पाटना लगभग असंभव लगता है। सच्चाई यह है: भारत इस दौड़ में शामिल ही नहीं हो सकता। सेमीकंडक्टर और एआई जैसी नई मूलभूत तकनीकों में भारत छह पीढ़ियों से पिछड़ा हुआ है। हर साल भारत के उच्च तकनीकी कार्यबल में महज 50,000 वास्तविक रूप से सक्षम युवा आते है।... भारत का कुल “क्रिटिकल टेक स्कोर” वैश्विक सूचकांकों पर मात्र 15.2 है, जबकि अमेरिका का 80 से ऊपर और चीन का लगभग 70 है। हाल में वरिष्ठ निवेशक पुनीता कुमार...

  • मध्यम मार्ग ही उचित

    एआई से तैयार कंटेन्ट आज एक ऐसी हकीकत हैं, जिनके साथ जीना समाज को सीखना होगा। ऐसे कंटेन्ट समाज उथल-पुथल का जरिया बन सकते हैं। अतः इस कारोबार से जुड़े सभी पक्षों को न्यूनतम अनुशासन स्वीकार करना चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) से तैयार कंटेन्ट को विनियमित करने के लिए पिछले हफ्ते सरकार ने नियमों का प्रारूप जारी किया, जिसको लेकर एआई प्लैटफॉर्म्स, कंटेन्ट क्रियेटर्स और इस उद्योग से जुड़े दूसरे हितधारकों ने कई आशंकाएं जताई हैं। एक प्रमुख दलील यह है कि इन नियमों का कंटेन्ट क्रियेटर्स की रचनात्मकता पर खराब असर पड़ेगा। खास एतराज कंटेन्ट के दस फीसदी हिस्से...

  • एआई नहीं, सिस्टम है समस्या

    अब जबकि एआई एक प्रचलित तकनीक के रूप में हमारे सामने है, तो उसको दो मॉडल- दो स्टैंडर्ड भी हमारे समक्ष उपस्थित हैँ। औद्योगिक क्रांति होने के बाद यह पहला मौका है, जब ऐसा हुआ है। औद्योगिक क्रांतियों के पिछले हर दौर में जब भी कोई नई तकनीक उभरी, उसके प्रतिमान पश्चिमी देशों ने तय किए। लेकिन औद्योगिक क्रांति के चौथे दौर की तकनीक में ग्लोबल साउथ के एक देश ने ना सिर्फ समानांतर प्रगति की है, बल्कि उनके समानांतर प्रतिमान दुनिया के सामने रखे हैं। सत्येंद्र रंजन आम धारणा है कि दुनिया औद्योगिक क्रांति के चौथे दौर में प्रवेश...

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तापमान को खतरा?

    इन्टरनेशनल एनर्जी एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक टेक कंपनियों के डेटासेंटर्स में बिजली की खपत वर्तमान की तुलना में दुगुनी हो जाएगी, जबकि आर्टफिशल इन्टेलिजन्स से जुड़े डेटासेंटर्स में यह मांग चार गुना अधिक होगी| वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर डेटासेंटर्स में बिजली की खपत इतनी होगी जितना आज पूरे जापान की बिजली खपत है| रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में एक डेटासेंटर में जितनी बिजली की खपत है, उससे लगभग एक लाख घरों के बिजली की खपत पूरी की जा सकती है| वर्ष 2024 में क्लाइमेट एक्शन अगेंस्ट डिसइनफार्मेशन नामक वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के एक...

  • एआई में भारत का जबरदस्त मौका!

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे समय में फ्रांस की राजधानी पेरिस में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई के एक्शन समित की सह अध्यक्षता की, जब पूरी दुनिया में इसकी धूम है। सभी महाशक्तियों में इसमें आगे निकलने की होड़ है। ओपनएआई अमेरिका की पहली कंपनी है। अब कई कंपनियां इसके टूल्स तैयार कर रही हैं। इसके जवाब में चीन ने सस्ता डीपसीक मॉडल पेश किया है। मोदी पेरिस में जिस सम्मेलन की सह अध्यक्षता कर रहे थे उसमें अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस भी थे। उन्होंने चीन के डीपसीक का मजाक उड़ाते हुए उसे सस्ता और सरकारी मॉडल कहा। उनका...

  • ज्यादा कुछ हासिल नहीं

    आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के क्षेत्र में इस वक्त सर्व प्रमुख चिंता बंटते प्रतिमान हैं। एआई क्षेत्र में अमेरिका और चीन निर्विवाद रूप से अग्रणी महाशक्ति हैं, जो एक दूसरे से बिल्कुल अलग दायरे में और अलग मकसदों से एआई को विकसित कर रहे हैं। आशंका है कि इन दोनों महाशक्तियों में प्रतिमानों और इस आधुनिक तकनीक के संचालन संबंधी कायदों पर न्यूनतम आम-सहमति नहीं रही, तो विभिन्न देश दो में से किसी एक प्रतिमान को चुनने के लिए मजबूर होते जाएंगे। ऐसा हुआ, तो वो दिन दूर नहीं, जब इंटरनेट का वैश्विक ताना-बाना भी विभाजित हो जाएगा। एआई पर राजनेताओं...

  • भारत के सामने प्रश्न

    एआई भविष्य संवारने का आधार है, जिसका वर्तमान शुरू हो चुका है। भारत आखिर इसकी छिड़ी होड़ में कहां है? वैसे बताया जाता है कि ग्लोबल एआई रैंकिंग में उन दो देशों के अलावा ब्रिटेन के बाद भारत चौथे नंबर पर है। अमेरिका में राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद डॉनल्ड ट्रंप ने अपनी पहली बड़ी पहल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के क्षेत्र में की है। उन्होंने चार बड़ी कंपनियों के साझा उद्यम- स्टारगेट की शुरुआत की है। ओपेन एआई, ऑरेकल, सॉफ्ट बैंक और एमजीएक्स इसके तहत एआई केंद्रित बुनियादी ढांचे के विकास पर 500 बिलियन डॉलर खर्च करेंगी। ट्रंप प्रशासन...

और लोड करें